छतरपुर। शहर की न्यू कॉलोनी स्थित शासकीय 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी केंद्र) में एक नाबालिग पीड़िता के साथ रूह कंपा देने वाली क्रूरता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सेंटर में ही आश्रय ले रहीं अन्य नाबालिग लड़कियों ने आपसी विवाद के चलते एक किशोरी के साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए उसके प्राइवेट पार्ट में टूथब्रश डाल दिया। घटना के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ने पर उसे गंभीर अवस्था में उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निर्देश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पॉक्सो (POCSO) एक्ट और मारपीट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर 4 नाबालिग लड़कियों को आरोपी बनाया है।


सुरक्षित आश्रय स्थल में बर्बरता: आंख और पेट में भी आईं गंभीर चोटें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता किसी पारिवारिक या कानूनी संरक्षण के चलते न्यू कॉलोनी स्थित वन स्टॉप सेंटर में रह रही थी। रात के समय केंद्र के कमरे में किसी बात को लेकर उसका वहां रह रही अन्य साथी लड़कियों से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि चारों लड़कियों ने मिलकर पीड़िता को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि हमलावर लड़कियों ने उसे संभलने का मौका नहीं दिया और उसके साथ घिनौनी हरकत करते हुए प्राइवेट पार्ट में टूथब्रश डाल दिया। मारपीट के दौरान पीड़िता की आंख और पेट में भी गंभीर चोटें आई हैं। सुबह जब पीड़िता की तबीयत ज्यादा बिगड़ी और उसने अपनी आपबीती बताई, तो केंद्र प्रबंधन में हड़कंप मच गया। पीड़िता को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका मेडिकल परीक्षण और इलाज चल रहा है।


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पुलिस और महिला बाल विकास विभाग में हड़कंप, दो अलग-अलग FIR दर्ज

शासकीय आश्रय गृह में इस तरह की बर्बर घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पीड़िता के बयान और परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। मामले में यौन उत्पीड़न, शारीरिक प्रताड़ना और मारपीट से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट का समावेश किया गया है। पुलिस ने घटना में संलिप्त कुल चार नाबालिग बालिकाओं को आरोपी बनाया है। चूंकि सभी आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के प्रावधानों के तहत विधिक प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।


स्टाफ की भूमिका पर भी उठे सवाल, निष्पक्ष जांच के आदेश

वन स्टॉप सेंटर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर रात के वक्त इतनी बड़ी वारदात हो जाना सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है। मामले में पुलिस पीड़िता और आरोपियों के साथ-साथ वन स्टॉप सेंटर के ड्यूटी स्टाफ, अधीक्षिका और सुरक्षाकर्मियों से भी विस्तृत पूछताछ कर उनके बयान दर्ज कर रही है।


"वन स्टाप सेंटर के प्रशासन द्वारा सिविल लाइन थाने में एक आवेदन दिया गया। जिसमें वहीं पर रहने वाली एक नाबालिग बालिका के साथ में वहीं पर रहने वाली चार अन्य बालिकाओं द्वारा मारपीट, धमकाना और लैंगिक उत्पीडऩ के कार्य किए गए। जिसमें बीएनएस और पोक्सो एक्ट की धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। उक्त घटना 25 और 26 सितम्बर की दरम्यानी रात की है। बालिका को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार है। उक्त बालिका अन्य राज्य से संबंधित है। वहां से गई थी और फिर चाइल्ड हेल्प लाइन को सूचना आई तब उसका बालिका को सुरक्षित वन स्टाप सेंटर में रखवाया गया था। जब इस बालिका से बात की गई तो एक अन्य बालिका के साथ भी अन्य चार बालिकाओं द्वारा मारपीट की गई थी और अमानवीय कृत्य किया गया था, जिसके लिए वन स्टाप सेंटर से संबंधित उन्हीं चार आरोपी बालिकाओं के विरूद्ध अलग से एक और मामला दर्ज किया गया है। चूंकि सुरक्षा के लिए होमगार्डकर्मियों की व्यवस्था है साथ ही प्राइवेट गार्ड भी लगाए गए हैं, इसलिए तस्दीक वन स्टाप सेंटर वाले करेंगे। सीसीटीव्ही भी वहां लगे हुए हैं जिसकी विभागीय स्तर पर जांच की जाएगी।"

— रजत सकलेचा, पुलिस अधीक्षक (एसपी), छतरपुर