ढाका। बांग्लादेश में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच बच्चों की हत्या, अपहरण और यौन शोषण की बढ़ती वारदातों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता में डर का माहौल है।‘द बॉर्डर लेंस’ की एक रिपोर्ट में विस्तार से इस पर चर्चा की गई है। इसके अनुसार, “बांग्लादेश में, जैसे ही कोई बच्चा घर से बाहर निकलता है, मां के लिए दिन का सबसे लंबा इंतजार शुरू हो जाता है। जब तक बच्चा वापस नहीं आता, तब तक फोन कॉल में देरी, मैसेज का जवाब न मिलना या समय पर कदमों की आहट न सुनाई देना एक आम दोपहर को घंटों की बेचैनी में बदल देता है। कई अभिभावकों के लिए, घर और स्कूल के बीच का सफर रोजाना की एक ऐसी निगरानी बन गया है, जिसे बच्चे के लौटने के अनुमानित समय और उस समय के बीत जाने पर होने वाली घबराहट से मापा जाता है।”
18 सितंबर को, 13 साल के इशियत शहरियार ओप्रातिम ने कुमिला जिला स्थित अपने घर से निकलते समय मां नाहिदा बेगम (जो कुमिला यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं) से कहा कि वह दोस्तों के साथ उनके आईफोन से तस्वीरें लेने जा रहा है। फिर वो वापस नहीं लौटा। पुलिस और बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 24 घंटे बाद यूनिवर्सिटी के पास सनंदा पहाड़ियों से उसका शव बरामद किया गया।
‘द बॉर्डर लेंस’ ने नाहिदा के हवाले से यह बात कहा, “मेरा एक ही बेटा था। अब मेरे जीने का क्या मकसद है? वे आईफोन ले जा सकते थे, लेकिन उन्होंने मेरे बेटे को क्यों मारा? मैं कुमिला में काम करने आई थी... क्या यही मेरा गुनाह है? मेरे बेटे को क्यों मारा गया? मुझे इसका जवाब चाहिए। अब मैं कैसे जीऊंगी?”
उसी दिन एक अलग घटना में, सुनामगंज जिले के ताहिरपुर उपजिला में एक ही परिवार के तीन बच्चों जिनकी उम्र 10, सात और दो साल थी के शव मिले। तीनों की हत्या कर दी गई थी।
ढाका की एक मां ने नाम न बताने की शर्त पर ‘द बॉर्डर लेंस’ को बताया, “तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार हमारे प्यारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती। यहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। लगभग हर दूसरे दिन हम अपने कीमती बच्चों को खो रहे हैं। यह दिल तोड़ने वाला है। कोई देश इस तरह नहीं चल सकता।"
इसके अलावा, ढाका में नौ साल के बच्चे की मां शेउली अख्तर ने कहा, “हम अभी बांग्लादेश में मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हमारे बच्चे अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं। हम हर समय अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं।”
रिपोर्ट में रिहायशी धार्मिक संस्थानों से जुड़े एक चिंताजनक पैटर्न पर रोशनी डाली गई; बांग्लादेश में हाल ही में लड़कों के यौन शोषण के कई आरोपों का संबंध इन्हीं संस्थानों से रहा है।
ढाका के सावर में, सात साल के एक लड़के का कथित तौर पर उस मदरसे में लगभग छह महीने तक बार-बार यौन शोषण किया गया, जहां वह रहता और पढ़ता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद उसके पिता ने संस्थान के 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिनमें कई शिक्षक भी शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है, "बयान में आरोप लगाया गया कि दाखिले के कुछ दिनों बाद ही उसका उत्पीड़न शुरू हो गया था। बाद में उसने एक शिक्षक से मदद मांगी, जिसने कथित तौर पर उसका शोषण किया और धमकी दी कि अगर उसने अपने माता-पिता को बताया तो उसे निकाल दिया जाएगा।"
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन 'एन ओ सालिश केंद्र' (एएसके) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच बांग्लादेश में हत्या, रेप, शारीरिक शोषण और हिंसा की अन्य घटनाओं में 155 बच्चों की मौत हुई। इनमें से कई मामले बच्चों के लापता होने के बाद हत्या से जुड़े थे।
बच्चों की हत्याओं के साथ-साथ देश भर में बच्चों के लापता होने का संकट भी जारी है। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न मीडिया माध्यमों ने बताया है कि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच देश भर में 15,000 से अधिक बच्चे लापता हुए, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
इस महीने की शुरुआत में, बांग्लादेशी पुलिस मुख्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि साल के पहले सात महीनों में 15,717 बच्चे लापता हुए थे। हालांकि 13,679 बच्चों का पता लगा लिया गया, लेकिन 2,038 बच्चे अभी भी लापता हैं, जो कुल संख्या का लगभग 13 प्रतिशत है।











