मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल वृंदावन से एक सनसनीखेज और दुखद घटना सामने आई है। संत प्रेमानंद महाराज के ट्रस्ट 'केली कुंज' द्वारा संचालित 'गुरु कृपा कुंज' बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर उनके 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण ने आत्महत्या कर ली। घटना के बाद गंभीर हालत में उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


घटनास्थल और मृतक के कमरे से फॉरेंसिक टीम को खून से सना एक ग्राइंडर मिला है। शुरुआती परिस्थितियों और शरीर पर मिले घावों के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि इमारत से कूदने से पूर्व उन्होंने ग्राइंडर से स्वयं के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


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CCTV फुटेज में कूदते दिखे; कमरे से मिला संदिग्ध ग्राइंडर और फॉरेंसिक साक्ष्य

क्षेत्राधिकारी (सीओ) संदीप सिंह और एसपी सिटी राजीव कुमार के अनुसार: घटना स्थल का गहन निरीक्षण किया गया है और फॉरेंसिक टीम ने कमरे से साक्ष्य जुटाए हैं। एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज मिला है, जिसमें रसिक दुलारी शरण बिल्डिंग की चौथी मंजिल से छलांग लगाते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस मृतक के मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले उनकी किससे बात हुई थी और किन परिस्थितियों में उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।


जबलपुर के रहने वाले थे दीपक; 2 साल पहले दीक्षा लेकर बने थे रसिक दुलारी शरण

मृतक मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। उनका वास्तविक नाम दीपक लोधी था। लगभग दो वर्ष पूर्व वे वृंदावन आए थे और संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेकर अपना नाम 'रसिक दुलारी शरण' रख लिया था। वे 3,000 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके थे। बिजली कार्य में दक्ष होने के कारण उन्हें आश्रम में इलेक्ट्रिकल रखरखाव की सेवा सौंपी गई थी। तीन महीने पहले ही उन्हें वराह घाट स्थित गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर कमरा आवंटित किया गया था।

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मां और परिजनों के गंभीर आरोप: "मिलने नहीं दिया जाता था, फोन पर भी लगाई जाती थी पाबंदी"

हादसे की सूचना मिलने के बाद जबलपुर से मथुरा पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की मां लौंग बाई और बहनोई सोनू पटेल ने आश्रम प्रबंधन और व्यवस्थापकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है: परिजनों का आरोप है कि दीक्षा लेने के बाद से ही उन्हें दीपक/रसिक से सुचारू रूप से मिलने नहीं दिया जाता था। जब भी वे वृंदावन आते थे, उन्हें दिनभर बैठाकर रखा जाता था लेकिन मुलाकात नहीं कराई जाती थी। बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें सीधे अस्पताल जाने के बजाय आश्रम आने को कहा गया और घंटों बैठाकर रखा गया।


मामले से जुड़े अनसुलझे सवाल और पुलिस की कार्रवाई

25 वर्षीय युवा शिष्य ने यह कठोर कदम क्यों उठाया? इस पर न तो पुलिस के पास स्पष्ट जवाब है और न ही आश्रम प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। सर्वोदय अस्पताल के अनुसार मरीज को मृत अवस्था में लाया गया था। घटना के काफी देर बाद पुलिस को सूचना मिलने के कारणों की भी जांच हो रही है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार वे पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन (अवसाद) में थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।