पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। रिजर्व के किशनगढ़ कोर क्षेत्र में शनिवार को एक वयस्क नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। बाघ की मौत की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। हालांकि, अभी तक वन विभाग की ओर से मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन घटनास्थल के हालात और वहां मिले साक्ष्यों के आधार पर बाघ को जहर देकर मारे जाने (पॉइजनिंग) की गंभीर आशंका जताई जा रही है।


शनिवार दोपहर करीब 2 बजे वन विभाग की गश्ती टीम को किशनगढ़ कोर क्षेत्र के एक सुदूर और दुर्गम इलाके में बाघ का शव होने की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेंद्र पटेल वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों की विशेष टीम के साथ मौके पर पहुंचे। भौगोलिक रूप से इलाका काफी कठिन होने के कारण वन विभाग को शुरुआती जांच और साक्ष्य जुटाने में काफी सावधानी बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने बताया कि बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित हैं और मौत की असली वजह का पता लगाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।


पहली नजर में प्राकृतिक मौत का दावा, पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

हादसे को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेंद्र पटेल ने शुरुआती बयान में कहा है कि बाघ का शव पूरी तरह से सुरक्षित अवस्था में पाया गया है, जिससे पहली नजर में यह मामला किसी आपसी संघर्ष या बाहरी हमले का नहीं, बल्कि प्राकृतिक मौत का प्रतीत होता है। इसके बावजूद, विभाग किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरत रहा है। मौत के वास्तविक और वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करने के लिए बाघ के शव का नियमानुसार पोस्टमार्टम (Autopsy) कराया जा रहा है। साथ ही फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी बिसरा (Visceral Samples) और अन्य महत्वपूर्ण सैंपल सुरक्षित कर विशेष प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम स्थिति साफ होगी।


भैंस के शव से गहराया शिकार का संदेह और सुरक्षा पर सवाल

विभागीय सूत्रों और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के अनुसार, जहां बाघ का शव बरामद हुआ है, उसके ठीक पास ही एक भैंस का शव भी मिला है। प्राथमिक तौर पर ऐसा लग रहा है कि बाघ ने कुछ समय पहले ही उस भैंस का शिकार किया था। वन्यजीव प्रेमियों और सूत्रों को आशंका है कि संभवतः मवेशी के मालिक या किसी अज्ञात शिकारी ने बाघ से बदला लेने या उसका शिकार करने की नीयत से भैंस के शव पर कोई घातक जहर लगा दिया था। इसी जहरीले मांस को खाने की वजह से वयस्क बाघ की अकाल मृत्यु हो गई। हालांकि, वन विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से इस 'सिंडिकेट किलिंग' या जहर की थ्योरी की पुष्टि नहीं की है।


इस ताजा घटना ने एक बार फिर पन्ना टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था, गश्ती तंत्र (Patrolling System) और वन्यजीवों की निगरानी प्रणाली को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। पन्ना में पिछले कुछ समय में वन्यजीवों के अवैध शिकार और बाघों की संदिग्ध मौतों के मामले लगातार सुर्खियों में रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फॉरेंसिक जांच में जहर देने की बात सच साबित होती है, तो यह क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का एक खतरनाक रूप होगा। वन विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि किसी भी प्रकार की साजिश, शिकार या जहर देने की पुष्टि होती है, तो दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।