क्वेटा। पाकिस्तानी सेना की बेरहम कार्रवाई और सख्त जांच प्रक्रिया से परेशान बलूच अपने पुश्तैनी मकान छोड़ कर जाने को मजबूर हो रहे हैं। स्थानीय मीडिया ने सूत्रों के हवाले से मार्मिक तस्वीर पेश की है। उनके मुताबिक केच जिले के चुर और गेश्तार्दान इलाकों से कई परिवार पलायन कर रहे हैं, वहीं आस-पास की बस्तियों के लोग भी उन घरों को छोड़कर जा रहे हैं जहां उन्होंने बचपन गुजारा था।रिपोर्ट्स के मुताबिक, केच जिले की जमुरान तहसील के चुर और गेश्तार्दान से विस्थापित हुए लोगों की सही संख्या का फिलहाल पता लगाना मुश्किल है।

'द बलूचिस्तान पोस्ट' से बात करते हुए एक स्थानीय निवासी ने उन वजहों का जिक्र किया जिसने आम बलूचों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बताया कि हाल के महीनों में चेकपॉइंट्स की संख्या काफी बढ़ गई है, जिससे आना-जाना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा, "पहले हमें हर दो किलोमीटर पर रोका जाता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से हर किलोमीटर पर कड़ी जांच की जा रही है।"

आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना स्थानीयों के घरों में खाने-पीने के सामान का रिकॉर्ड रख रही है और अंधेरा होने के बाद लोगों को कहीं भी आने-जाने से रोक रही है। ऐसे समय में भी जब उन्हें इलाज की सख्त जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि घरों के ऊपर लगातार ड्रोन की निगरानी ने परिवारों पर दबाव और बढ़ा दिया है।

निवासियों के अनुसार, बढ़ती पाबंदियों और लगातार निगरानी के कारण परिवारों के लिए जमुरान में रहना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें अपने पुश्तैनी घरों और जमीन को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिनिधियों के सामने यह मुद्दा उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जमुरान में ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं जब बलूचिस्तान के अन्य इलाकों में भी संभावित सैन्य अभियानों से पहले लोगों के विस्थापित होने की खबरें आ रही हैं।

इस बीच, बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के चेयरमैन नसीम बलोच ने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में दशकों से खून-खराबा, दमन और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और प्रांत पर देश के "कब्जे" को खत्म करने की मांग की है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर ध्यान देने और पाकिस्तानी सेना द्वारा लगातार किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

सोमवार को 'एक्स' पर नसीम ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय लोगों के जबरन गायब किए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, दमन और मानवाधिकारों के अन्य गंभीर उल्लंघनों के मामलों में चुप नहीं रह सकता। पाकिस्तान को बलूचिस्तान पर अपना कब्जा खत्म करना होगा। वरना, इतिहास उन लोगों को जिम्मेदार ठहराएगा जो चुप रहते हैं और खामोश रहकर इन अन्यायपूर्ण करतूतों में मदद करते हैं।"

इसके अलावा, बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताते हुए बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने कहा कि पूरे प्रांत में "सामूहिक सजा और बलूच नरसंहार का सिलसिला" तेजी से जारी है।

बीवाईसी ने कहा, "मीडिया के जरिए मस्तुंग में बागान मालिकों को राज्य की ओर से दी गई सार्वजनिक धमकियां और उनकी मेहनत से उगाए गए बागों को नष्ट करने की धमकियां इस बात का साफ संकेत हैं कि बलूचिस्तान में राज्य के दमन और सामूहिक सजा की नीति को सबसे क्रूर हद तक बढ़ाया जा रहा है।"