आगर-मालवा। मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम फतेहपुर मेंढकी में सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। गांव में ब्राह्मण समाज के 67 वर्षीय सत्यनारायण शर्मा और अनुसूचित जाति वर्ग के 65 वर्षीय नारायण मालवीय के निधन के बाद ग्रामीणों ने जात-पात की बंदिशों को पीछे छोड़ते हुए दोनों बुजुर्गों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली। इस पहल की अब पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है।
बैंड-बाजे के साथ एक साथ उठीं दो अर्थियां, पूरा गांव बना सहभागी
दुख की इस घड़ी में गांव के दोनों परिवारों के साथ पूरा फतेहपुर मेंढकी एकजुट खड़ा नजर आया: सत्यनारायण शर्मा और नारायण मालवीय के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों ने सहमति बनाकर दोनों की अर्थियां एक साथ उठाने का निर्णय लिया। माकड़ौन से विशेष रूप से बुलाए गए बैंड-बाजे की धुन पर गांव की गलियों से दोनों की संयुक्त अंतिम यात्रा निकली, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। अंतिम यात्रा में जाति और वर्ग का कोई भेद नजर नहीं आया। दोनों परिवारों के सदस्य एक-दूसरे के गम में सहभागी बने और ग्रामीणों ने इसे पूरे गांव का साझा दुख मानकर विदाई दी।
"सिर्फ दो परिवारों का नहीं, पूरे गांव का दुख" — ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने की तारीफ
इस मिसाल के बाद आगर-मालवा क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर ग्रामीणों की जमकर प्रशंसा हो रही है: गांव के निवासी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि फतेहपुर मेंढकी में हमेशा से आपसी भाईचारा रहा है। जब दो बुजुर्गों का एक साथ निधन हुआ, तो पूरे गांव ने उनके परिवारों के दुख को अपना माना और इंसानियत का रिश्ता सबसे ऊपर रखा। आगर विधायक मधु गेहलोत और भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय ने ग्रामीणों की इस संवेदनशील पहल को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज में जातिगत दूरियां देखने को मिलती हैं, ऐसे में यह घटना सामाजिक समरसता और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देती है।
फतेहपुर मेंढकी गांव से सामने आई यह तस्वीर यह साबित करती है कि संवेदनाएं और मानवीय मूल्य किसी जाति या वर्ग की सीमा में नहीं बंधते, बल्कि मुश्किल वक्त में एक-दूसरे के साथ खड़े होना ही इंसानियत की असली पहचान है।













