छतरपुर/खजुराहो, सतेन्द्र सिंह। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले अंतर्गत विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पदस्थ एक चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही और समय पर इलाज न देने के चलते मरीज की जान जाने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हार्ट अटैक की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाए गए बुजुर्ग मरीज को देखने के लिए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे, जिसके कारण उपचार के अभाव में मरीज ने दम तोड़ दिया। इस मामले को लेकर खजुराहो निवासी अमित सिंह राठौर ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, भोपाल को ऑनलाइन शिकायत (शिकायत संख्या 41239622) दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और दोषी चिकित्सक के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता अमित सिंह राठौर ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि 23 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे उनके चाचा रामस्वरूप को अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट (हार्ट अटैक के लक्षण) हुई। परिजन तत्काल उन्हें गंभीर हालत में खजुराहो के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, उस वक्त अस्पताल की ओपीडी में तीन अन्य डॉक्टर मौजूद थे। जब परिजनों ने मरीज की नाजुक हालत बताते हुए तुरंत इलाज शुरू करने की गुहार लगाई, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने कथित तौर पर यह कहकर देखने से मना कर दिया कि इस इमरजेंसी केस को डॉ. अजीत जादौन देखेंगे, क्योंकि वर्तमान में उन्हीं की इमरजेंसी/ड्यूटी का समय है।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि जब उन्होंने डॉ. अजीत जादौन के बारे में पता किया, तो जानकारी मिली कि वे अपने शासकीय आवास पर कथित रूप से निजी मरीजों को देख रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने तुरंत डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर कॉल कर चाचा की अत्यंत नाजुक हालत का हवाला दिया और तत्काल अस्पताल आकर चेक करने व दवा-इंजेक्शन देने की गुहार लगाई। परिजनों का दावा है कि बार-बार अनुरोध करने के बाद भी डॉक्टर तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचे।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब तक डॉ. जादौन अपने आवास से निकलकर करीब आधे घंटे की देरी से अस्पताल पहुंचे, तब तक उनके चाचा रामस्वरूप ने समय पर प्राथमिक और जीवनरक्षक उपचार न मिल पाने के कारण दम तोड़ दिया था। यदि समय रहते डॉक्टर मौके पर पहुंचकर प्राथमिक सीपीआर या आवश्यक इंजेक्शन व दवा दे देते, तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल परिसर में मरीज की मौत के बाद परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया।
पीड़ित परिजनों ने मामले को सीधे शासन स्तर पर उठाते हुए मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस को तरजीह देना गरीब और जरूरतमंद मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, डॉक्टर की ड्यूटी रोस्टर और कॉल डिटेल्स की जांच कराने की मांग की है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सत्यता सामने आ सके और लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।














