भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि पर काबिज 'स्वामित्व योजना' के 50 लाख से अधिक ग्रामीण हितग्राहियों को उनकी जमीन और मकान का मालिकाना हक (स्वामित्व कार्ड व रजिस्ट्री) देने के लिए राज्य सरकार 17 सितंबर से व्यापक अभियान शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मुफ्त रजिस्ट्री की यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस योजना को गति देने के लिए सरकार ने राजस्व और पंचायत विभाग के मैदानी अधिकारियों को भी सब-रजिस्ट्रार (उप पंजीयक) की शक्तियां सौंप दी हैं।
हर अधिकारी को रोजाना 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य, नई शक्तियों का आवंटन
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के समक्ष दिए गए प्रस्तुतिकरण के बाद प्रक्रिया को तेज करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं: रजिस्ट्रीकरण में तेजी लाने के लिए अधिकार प्राप्त प्रत्येक अधिकारी को प्रतिदिन न्यूनतम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया है। वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना के तहत राजस्व निरीक्षक (RI) और प्रभारी RI को पंजीयन अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत अपने-अपने जिलों में सब-रजिस्ट्रार के अधिकार दिए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहायक विकास विस्तार अधिकारी और पंचायत समन्वय अधिकारी को उनके पदस्थ जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक घोषित किया गया है। प्रदेश के सभी तहसीलदारों को पूर्व में ही सब-रजिस्ट्रार के अधिकार दिए जा चुके हैं।
पटवारियों ने जताया विरोध, कानूनी पेंच फंसने की जताई आशंका
योजना के क्रियान्वयन के बीच पटवारी संघ ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है: रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के स्थान पर संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज किया जा रहा है, जिसका पटवारी संघ विरोध कर रहा है। पटवारियों का तर्क है कि भविष्य में जमीन से संबंधित किसी भी कानूनी विवाद या मुकदमेबाजी की स्थिति में पटवारियों के कानूनी बचाव का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे वे अनावश्यक कानूनी झमेलों में फंस सकते हैं।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब 17 सितंबर से प्रदेश भर में इस अभियान को बड़े पैमाने पर लागू करने की प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं।














