छतरपुर, आयुष शुक्ला। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का छतरपुर वृत्त इन दिनों अपनी लचर कार्यप्रणाली, मनमानी और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) अमर श्रीवास्तव और स्थानीय अधिकारियों पर शहर में कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहीं अवैध कॉलोनियों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बिजली कनेक्शन और लाइनें खींचने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बिना रेरा (RERA) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की वैधानिक स्वीकृतियों के काटी जा रही अवैध कॉलोनियों को कथित मिलीभगत से रोशन करने के इस खेल में लाखों रुपये के वारे-न्यारे होने की चर्चाएं आम हैं।
बिना रेरा-टीएनसीपी के काटी जा रही कॉलोनियां, बिजली विभाग बांट रहा कनेक्शन
छतरपुर शहर और आसपास के मैदानी इलाकों में भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों का जाल तेजी से पैर पसार रहा है। मास्टर प्लान और विकास नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बगैर नगर एवं ग्राम निवेश (TNCP) की अनुमति और बगैर रेरा पंजीयन के कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
नियमों के अनुसार ऐसी अनाधिकृत कॉलोनियों में तब तक स्थायी अधोसंरचना या बिजली के पोल व ट्रांसफार्मर नहीं लगाए जा सकते, जब तक सक्षम प्राधिकारी की वैधानिक अनुमतियां न हों। आरोप है कि कार्यपालन अभियंता अमर श्रीवास्तव की कथित साठगांठ से कॉलोनाइजरों से सांठगांठ कर और मोटी रकम लेकर धड़ल्ले से बिजली कनेक्शन स्वीकृत किए जा रहे हैं।
अधीक्षण अभियंता (SE) एस.बी. सिंह ने नगरपालिका पर फोड़ा ठीकरा, पल्ला झाड़ा
अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शनों के इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर जब अधीक्षण अभियंता (SE) एस.बी. सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनका रवैया बेहद टालमटोल भरा रहा। उन्होंने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए गेंद नगरपालिका के पाले में डाल दी। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा, "आप बताएं ऐसी कॉलोनियों के नाम, हम कार्रवाई करेंगे।"
जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का यह बयान न केवल उनके दायित्वों से भागने जैसा नजर आता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जिस विभाग के मैदानी अमले को शहर के चप्पे-चप्पे पर बिजली खंभे और लाइन बिछाने की जानकारी होती है, क्या उसे अपने ही क्षेत्र में पनप रहीं अवैध बस्तियों की खबर नहीं है?
खंभे चोरी से लेकर आउटसोर्स कर्मी की मौत तक: लगातार विवादों के घेरे में विभाग
गौरतलब है कि छतरपुर बिजली विभाग और कार्यपालन अभियंता अमर श्रीवास्तव पर विवादों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व विभाग के सरकारी बिजली खंभों की कथित हेराफेरी व चोरी का मामला भी जमकर गरमाया था। इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों के अभाव में एक आउटसोर्स कर्मचारी की दर्दनाक मौत का मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। खंभे चोरी, कर्मचारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ और अब अवैध कॉलोनियों को गैरकानूनी तरीके से उपकृत करने के आरोपों ने विभाग की साख को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। अब देखना होगा कि जनहित से जुड़े इस कथित सिंडिकेट और वित्तीय अनियमितताओं पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच बैठाते हैं या फिर विभागीय चुप्पी के बीच यह खेल यूं ही बदस्तूर चलता रहेगा।














