हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले की प्रतिष्ठित 'नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला' की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर दो दिवसीय भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष समारोह का उद्देश्य धर्मशाला की नींव रखने वाले संस्थापक समाजसेवियों के अप्रतिम योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना और समाज की इस ऐतिहासिक विरासत से नई पीढ़ी को अवगत कराना है।
मात्र ₹400 में मिली थी 0.51 डिसमिल जमीन; 1926 में हुई थी औपचारिक स्थापना
नार्मदीय ब्राह्मण समाज मंदिर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी अशोक पाराशर और वयोवृद्ध मधुकर बिल्लौरे ने धर्मशाला के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया: ब्रिटिश हुकूमत के दौर में वर्ष 1921 में सेठ स्व. गणेशदास बलवटे की आतिथ्य में आयोजित समाज के प्रथम सम्मेलन में धर्मशाला निर्माण का विचार सामने आया था। स्व. गंगाविशन सदाशिव गुहा ने महज ₹400 की राशि में 0.51 डिसमिल भूमि समाज को उपलब्ध कराई थी। समाज की दूरदर्शी पहल के बाद 22 सितंबर 1926 को धर्मशाला की औपचारिक स्थापना की गई, जो आज हरदा जिले की सबसे पुरानी रिकॉर्डेड धर्मशालाओं में शुमार है।
इन 13 संस्थापक समाजसेवियों को किया जा रहा नमन
शताब्दी समारोह के संयोजक संदीप पाराशर ने बताया कि धर्मशाला के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले 13 संस्थापक सदस्यों को इस दो दिवसीय आयोजन में विशेष रूप से स्मरण व सम्मानित किया जा रहा है। इनमें स्व. रामेश्वरदास गार्गव, स्व. जगन्नाथ गुहा कडोला, स्व. मुंशी दामोदर प्रसाद पाराशर, स्व. ताराचंद दीवान बंडावाला, स्व. सीताराम दीवान पानतलाई, स्व. बाबू नाथुराम बिल्लौरे तजपुरावाले, स्व. लक्ष्मीनारायण निलोबा सराफ, स्व. मुंशी लच्छीराम सवालनवीस, स्व. कुंजीलाल नांदरा, स्व. हरलाल खजांची पानतलाई, स्व. गुलाबचंद बजाज, स्व. रामकरण लाल जोशी नागपुर और स्व. नाथूराम धनेसर खिड़कीवाला शामिल हैं।
23 सितंबर को स्मारिका 'आराध्या' का लोकार्पण और सम्मान सत्र
शताब्दी समारोह के तहत 23 सितंबर को हरदा स्थित गोपीकृष्ण गार्डन में प्रातः पंजीयन के साथ मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। कार्यक्रम के दौरान विशेष स्मारिका 'आराध्या - एक अनमोल विरासत' का औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा। इसके उपरांत समाज की भावी दिशा तय करने के लिए मंथन एवं संकल्प सत्र आयोजित होंगे, जिसके पश्चात समाज के प्रबुद्ध जनों के सम्मान समारोह के साथ इस दो दिवसीय शताब्दी महोत्सव का समापन होगा।













