नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कानून में संशोधन कर रही है, जबकि जरूरत पूरी व्यवस्था में बदलाव की है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा सरकार के कार्यकाल में 20 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि करोड़ों युवाओं की पहली मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी और अंततः मोदी सरकार को यह मांग माननी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक समिति बनाई और उसके बाद मंत्री पद पर बदलाव हुआ।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया। हमें उनके स्वागत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन असली सवाल यह है कि इससे प्रधानमंत्री को कितनी बड़ी राहत मिली। एक 'प्रधान' को हटाकर क्या प्रधानमंत्री ने खुद को कहीं बड़े संकट से नहीं बचा लिया?"
सपा सांसद ने कहा कि छात्र आंदोलन की सफलता के बाद जो नारे लगे, वे सरकार के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जो दावा करती थी कि वह किसी के सामने झुकती नहीं है, लेकिन अंततः उसे छात्रों की मांगें स्वीकार करनी पड़ीं।
विधेयक पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "जो लोग राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे? सरकार केवल पुराने कानून में संशोधन लेकर आई है। आखिर किसे गुमराह किया जा रहा है? अगर कानून इतना प्रभावी था तो भाजपा के 10 साल के शासन में 20 पेपर लीक कैसे हो गए?"
उन्होंने कहा कि यह देश का पहला छात्र आंदोलन था, जिसे छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों का भी व्यापक समर्थन मिला। इसी कारण यह आंदोलन इतना बड़ा बन सका और सरकार पर दबाव बना।
अखिलेश यादव ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई, वह आपातकाल के दौर की याद दिलाती है।
लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर हुई चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किया कि केवल कानून में संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।




