चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा द्वारा नीट के खिलाफ पारित किए गए नए प्रस्ताव के बावजूद चेन्नई में विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को पूरी तरह खत्म किए बिना वंचित और कमजोर वर्ग के छात्रों के हितों की रक्षा नहीं की जा सकती।तिरुवोट्टियूर और एग्मोर में दो अलग-अलग आंदोलन जारी हैं।

तिरुवोट्टियूर में पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी बालामुरुगन 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। रविवार को उनका अनशन 20वें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

बालामुरुगन तमिलनाडु के लिए नीट से छूट की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने दो अन्य मांगें भी रखी हैं। उन्होंने कथित तौर पर कॉकरोच संबंधी टिप्पणी को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही, दिल्ली में छात्रों पर कथित हमले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की है।

अनशन लंबा खिंचने के कारण बालामुरुगन के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दिवंगत मेडिकल अभ्यर्थी एस. अनीता के भाई मणिरत्नम ने उनसे मुलाकात की और राज्य सरकार से उनके स्वास्थ्य की जांच कराने तथा आंदोलन के लिए एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की।

अब तक कोई स्थान उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण बालामुरुगन अपने घर से ही विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

मणिरत्नम और एंटी-नीट फेडरेशन-तमिलनाडु के सदस्यों ने विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद अपना 12 दिन का भूख हड़ताल आंदोलन समाप्त कर दिया था। उनका कहना था कि सरकार ने उनकी एक मांग पूरी कर दी है।

इस संगठन ने शिक्षा को फिर से राज्य सूची में शामिल करने की मांग भी की है, ताकि राज्य अपनी प्रवेश नीतियां स्वयं तय कर सकें। साथ ही उन्होंने नीट को पूरी तरह समाप्त करने की भी मांग की है।

एक अलग प्रदर्शन एग्मोर के रुक्मणी लक्ष्मीपति रोड स्थित थायगम कॉम्प्लेक्स में पिछले 24 दिनों से जारी है।

ओजी तमिजा समूह द्वारा आयोजित यह धरना रोजाना दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक चलता है। इसमें छात्र, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेते हैं। संगठन संगीत, नाटक, नृत्य और अन्य कला रूपों के माध्यम से "आइए प्रतिरोध का उत्सव मनाएं" नारे के साथ जनसमर्थन जुटा रहा है।

शिक्षाविद प्रिंस गजेंद्र बाबू और मणिरत्नम ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल नीट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से ही संभव है। उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से विधानसभा के प्रस्ताव को मंजूरी देने की अपील भी की है।

इससे पहले 2024 में तत्कालीन डीएमके सरकार द्वारा नीट से छूट देने के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी।

नवीनतम प्रस्ताव पेश करते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री केजी अरुणराज ने कहा कि नीट उन छात्रों को फायदा पहुंचाती है जो महंगी कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं, और इससे स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम पर ध्यान कम होता है।

उन्होंने कहा कि इस परीक्षा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा में अवसर कम हुए हैं, जिससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में समानता का सिद्धांत कमजोर पड़ रहा है।