भोपाल। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सियासी हलचल तेज हो गई है। भोपाल मध्य सीट से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है, जिसमें 15 अगस्त के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख न किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
16 अगस्त को भोपाल से भेजा गया ज्ञापन
16 अगस्त को भोपाल से प्रेषित इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री ने अपने ऐतिहासिक संबोधन में देश के विभिन्न समुदायों के सेनानियों को नमन किया, लेकिन देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम शामिल नहीं किए गए।
ज्ञापन के मुख्य बिंदु और ऐतिहासिक संदर्भ
विधायक आरिफ मसूद द्वारा भेजे गए ज्ञापन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की साझी विरासत पर जोर देते हुए कई ऐतिहासिक साक्ष्यों और संदर्भों का उल्लेख किया गया है: ज्ञापन में 1757 (प्लासी के युद्ध) से लेकर 1947 तक के आजादी के सफर का जिक्र किया गया है। संन्यासी और फ़कीर विद्रोह जैसे शुरुआती ऐतिहासिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत की आजादी का संघर्ष किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश का साझा आंदोलन था। नेशनल वॉर मेमोरियल और अंडमान-निकोबार की प्रसिद्ध सेल्यूलर जेल (काला पानी) का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि इन स्थलों की दीवारें और अभिलेख हर वर्ग के वीरों की शहादत के गवाह हैं।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि इस पत्र का मुख्य उद्देश्य देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान इतिहास के इन महत्वपूर्ण पन्नों और देश की आजादी के लिए दी गई साझा कुर्बानियों की ओर आकर्षित करना है, ताकि भविष्य में आजादी के इस साझा इतिहास का सम्मान पूरी समग्रता के साथ हो सके।




