छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच सर्पदंश के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले 48 से 72 घंटों के दौरान जिला अस्पताल में सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक मरीज सांप के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचे हैं। सिविल सर्जन डॉक्टर शरद चौरसिया के अनुसार, बीते दो दिनों में ही जिला अस्पताल में स्नेक बाइट के 14 मरीज पहुंचे, जिनमें से एक मरीज को गंभीर देरी के कारण मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
मानसून के मौसम में खेतों, जंगलों और ग्रामीण बस्तियों में पानी भर जाने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सूखे और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी घरों की ओर रुख करते हैं। इसी दौरान लोगों के संपर्क में आने से सर्पदंश की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। दो दिन पूर्व भी जिले में रात को सोते समय सांप के काटने से सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया था, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है।
स्वास्थ्य विभाग ने चिंता जताते हुए कहा है कि सर्पदंश के अधिकांश मामलों में ग्रामीण मरीज को तुरंत अस्पताल लाने के बजाय झाड़-फूंक और स्थानीय तंत्र-मंत्र के फेर में पड़ जाते हैं। जब मरीज के शरीर में जहर पूरी तरह फैल जाता है और हालत नाजुक हो जाती है, तब उसे अस्पताल लेकर पहुंचते हैं। अंधविश्वास और इलाज में होने वाली यह अनावश्यक देरी मरीज की जान पर भारी पड़ जाती है।
सिविल सर्जन डॉक्टर शरद चौरसिया ने स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के पुख्ता इंतजाम हैं। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन मौजूद हैं। जिले में सालभर में करीब 1500 से 2000 एएसवी इंजेक्शन का उपयोग सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाने के लिए किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों ने आमजन से अपील की है कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद किए बिना मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचाएं। साथ ही बरसात के मौसम में घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, रात में निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करने और जमीन पर सोने से बचने की सख्त सलाह दी गई है।




