नई दिल्ली। बांग्लादेश सरकार की जांच में पता चला है कि अंतरिम सरकार के दौरान खेल सलाहकार रहे आसिफ नजरुल टीम के टी20 विश्व कप 2026 से हटने वाले फैसले के अकेले जिम्मेदार थे।

तीन सदस्यों वाली कमिटी ने मंगलवार को अपनी जांच जारी की। इसके मुताबिक उस समय बीसीबी के पास इस हाई-प्रोफाइल मुद्दे से निपटने के लिए स्वतंत्र रणनीतिक नेतृत्व, संकट से निपटने की क्षमता और लंबे समय की योजना की कमी थी।

24 जनवरी को, आईसीसी और बीसीबी के बीच बातचीत के बाद, आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह टी20 विश्व कप के लिए स्कॉटलैंड को चुना। यह फैसला तब लिया गया जब आईसीसी बोर्ड के ज्यादातर सदस्यों ने बांग्लादेश के हिस्सा लेने के खिलाफ वोट दिया, क्योंकि बीसीबी ने भारत में अपने मैच खेलने से मना कर दिया था।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के बाद बीसीसीआई ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर करने का आदेश दिया था। केकेआर ने बीसीसीआई का आदेश मानते हुए रहमान को लीग से बाहर कर दिया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव आया और इसका असर क्रिकेट के मैदान पर भी दिखा।

मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद उस समय देश के खेल मंत्री रहे नजरुल ने एक फेसबुक पोस्ट में ऐलान किया कि बांग्लादेश की टीम T20 वर्ल्ड कप के मैच भारत में नहीं खेलेगी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने अपने मैच भारत से श्रीलंका में शिफ्ट करने का अनुरोध आईसीसी से किया था। आईसीसी ने इसे अस्वीकृत करते हुए स्कॉटलैंड को विश्व कप में शामिल किया था।

नई सरकार में खेल मंत्री अमीनुल हक ने ऐलान किया था कि तीन सदस्यों वाली एक कमेटी इस बात की जांच करेगी कि टीम ने टी20 विश्व कप में हिस्सा क्यों नहीं लिया। कमेटी को यूथ एंड स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री में एडमिनिस्ट्रेशन सब-डिवीजन के एडिशनल सेक्रेटरी डॉ. एकेएम ओली उल्लाह हेड कर रहे थे। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान हबीबुल बशर और बैरिस्टर फैसल दस्तगीर भी शामिल थे।

जांच के दौरान टी20 कप्तान लिटन दास और टेस्ट कप्तान नजमुल हुसैन शांतो सहित जिम्मेदार पद पर बैठे कई लोगों का साक्षात्कार लिया गया। रिपोर्ट में दिए गए लगभग हर इंटरव्यू में नजरुल को टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के हिस्सा लेने के मामले में अकेले फैसला लेने वाला बताया गया। शान्तो और लिटन दोनों ने कहा कि नजरुल ने भारत में वर्ल्ड कप मैचों में हिस्सा लेने के प्रति खिलाड़ियों की सकारात्मक सोच के बावजूद यह फैसला लिया।

नजरुल ने बांग्लादेश के चुनावों से ठीक दो दिन पहले कहा था कि भारत में न खेलने का फैसला बीसीबी और बांग्लादेश के खिलाड़ियों ने किया था, न कि सरकार ने। लेकिन, मंगलवार को उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने खुद लिया था।