जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने सिवनी स्थित दल सागर तालाब पर फुट ओवर ब्रिज निर्माण तथा सौंदर्यीकरण का कार्य करने वाले ठेकेदार राहुल जैन को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति (जस्टिस) विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति (जस्टिस) प्रदीप मित्तल की युगल पीठ (डिवीजन बेंच) ने सिवनी नगर पालिका परिषद को सख्त निर्देश देते हुए ठेकेदार की लगभग ₹22 लाख की अविवादित बकाया राशि का 45 दिनों के भीतर भुगतान करने को कहा है।


अदालत का फैसला और ब्याज व हर्जाने का आदेश

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने नगर पालिका और राज्य शासन के रवैये पर स्पष्ट आदेश जारी किया: नगर पालिका को ठेकेदार की करीब ₹22 लाख की अविवादित राशि 45 दिनों में जारी करनी होगी। यदि निर्धारित 45 दिनों की अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो नगर पालिका परिषद को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से राशि चुकानी होगी। कार्य के अनावश्यक लंबित रहने और अदालती प्रक्रिया के चलते हाई कोर्ट ने नगर पालिका को याचिकाकर्ता को ₹15,000 का कानूनी हर्जाना (कॉस्ट) देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी अनुदान या फंड की अनुपलब्धता का आधार बनाकर किसी ठेकेदार का वैध और अविवादित भुगतान अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता।


2023 में मिला था अनुबंध, NGT के आदेश से रुका कार्य

मामले की पृष्ठभूमि में अनुबंध और निर्माण रोकने के मुख्य कारण निम्नलिखित रहे: याचिकाकर्ता राहुल जैन ने 10 मई 2023 को सिवनी नगर पालिका के साथ रजिस्टर्ड वर्क कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट किया था। इसके तहत दल सागर तालाब पर फुट ओवर ब्रिज का निर्माण और सेंट्रल आइलैंड का विकास किया जाना था। निर्माण कार्य के दौरान ही दल सागर तालाब से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में सुनवाई शुरू हुई।


NGT के अंतरिम आदेशों के कारण कार्य रोकना पड़ा और बाद में ट्रिब्यूनल ने तालाब को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने तथा अधूरे ढाँचे को गिराने का निर्देश दिया। काम रुकने के बाद ठेकेदार ने अपनी लगाई गई मैनपावर, मशीनरी व सामग्री के आधार पर बकाए के भुगतान और अनुबंध को औपचारिक रूप से समाप्त करने का आवेदन दिया, जिस पर नगर पालिका ने टालमटोल शुरू कर दी।


EOW की जांच और क्लीन चिट का मामला

नगर पालिका की ओर से भुगतान रोकने के पीछे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच का हवाला दिया गया था: नगर पालिका ने तर्क दिया था कि निर्माण में वित्तीय व तकनीकी शिकायतों की जांच EOW कर रहा था, इसलिए राशि रोकी गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने पीठ को अवगत कराया कि ठेकेदार को EOW की जांच में क्लीन चिट मिल चुकी है। हाई कोर्ट ने माना कि जब ठेकेदार EOW जांच में दोषमुक्त हो चुका है और निर्माण कार्य उसकी किसी गलती के कारण नहीं बल्कि NGT के आदेशों से बाधित हुआ है, तो उसका न्यायसंगत बकाया रोकना पूरी तरह अनुचित है।