जामनगर। गुजरात के जामनगर जिले में भारी बारिश के बीच 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने साहस, तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराकर मां और नवजात दोनों की जान बचाई। जामजोधपुर तहसील के कोटड़ा बावीसी गांव के वाडी क्षेत्र में जलभराव और कीचड़ के कारण एम्बुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन मेडिकल टीम ने मौके पर ही सुरक्षित डिलीवरी कराई।
जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) हसमुख सगाथिया और एम्बुलेंस पायलट कमलेश कंतारिया मौके के लिए रवाना हुए। लगातार बारिश के कारण गांव तक जाने वाला रास्ता कीचड़ से भर गया था और खेतों के रास्ते एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं था।
महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों कर्मचारी पैदल ही उसके घर पहुंचे। जांच के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि महिला को अस्पताल ले जाना संभव नहीं है और प्रसव में देरी मां और शिशु दोनों के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में 108 एम्बुलेंस टीम ने आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियों के साथ घर पर ही सुरक्षित प्रसव कराया।
सफल प्रसव के बाद स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मां और नवजात को खाट के जरिए करीब 500 मीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया। इसके बाद दोनों को बेहतर उपचार और निगरानी के लिए जामजोधपुर उप-जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई गई।
108 एम्बुलेंस सेवा के जामनगर प्रोग्राम मैनेजर मनवीर डागर ने आईएएनएस से बातचीत में बताया, "गुजरात सरकार की 108 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह निशुल्क है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्यभर में संचालित की जा रही है।"
उन्होंने कहा, "गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने की सूचना मिली थी। जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो भारी बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भर गया था और एम्बुलेंस घर तक नहीं जा सकती थी। हमारे दोनों कर्मचारी पैदल महिला के घर पहुंचे। वहां यह स्पष्ट हो गया कि अस्पताल पहुंचने का समय नहीं है, इसलिए उन्होंने मौके पर ही सुरक्षित प्रसव कराया। बाद में मां और नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया।"
मनवीर डागर ने बताया, "गुजरात के हर जिले और गांव तक 108 एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है। यदि किसी गरीब परिवार को रात या आपातकाल में अस्पताल जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं हो, तो वह 108 नंबर पर कॉल कर निशुल्क सहायता प्राप्त कर सकता है।"
भारी बारिश के बीच 108 एम्बुलेंस कर्मियों की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों ने इसे आपदा जैसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिबद्धता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।




