रतलाम। रतलाम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी का अपनी ही सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है। बुधवार को वे एसपी ऑफिस पहुंचे और अपने करीबी मित्र एवं मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर एसपी कार्यालय के बाहर जमीन पर बैठ गए। पूर्व मंत्री का आरोप है कि उन्होंने कुछ दिन पहले पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को पूरे मामले की जानकारी दी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि एक पूर्व मंत्री और जनप्रतिनिधि की शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


धरने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी अमित कुमार खुद बाहर आए और हिम्मत कोठारी से चर्चा कर उन्हें अंदर ले गए। इसके बाद संबंधित थाना प्रभारी को बुलाकर मामले की जानकारी ली गई और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मीडिया से बातचीत में कोठारी ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदेश में अफसरशाही हावी हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।


वहीं पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि संबंधित पक्ष को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। हालांकि पूर्व मंत्री की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी करने और मामले में आगे कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। रतलाम में भाजपा के वरिष्ठ नेता का अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ इस तरह खुलकर विरोध करना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। पार्टी छोड़ने की चेतावनी के बाद भाजपा संगठन के भीतर भी हलचल बढ़ गई है।