भिंड| भिंड जिले के अटेर विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से हाहाकार मचा हुआ है। क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में पिछले 72 घंटों से लगातार जारी 'ब्लैकआउट' के कारण ग्रामीण जनजीवन पटरी से उतर गया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली गुल होने से लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज हो गए हैं। लगातार की जा रही शिकायतों के बाद भी बिजली कंपनी द्वारा ठोस कदम न उठाए जाने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है।


पेयजल संकट सबसे बड़ा सिरदर्द, दूर-दराज से ला रहे पानी

अटेर क्षेत्र के गांवों में बिजली बंद होने से सबसे बड़ा संकट पीने के पानी का खड़ा हो गया है। दरअसल, इन गांवों की नल-जल योजनाएं और पानी की सप्लाई पूरी तरह बिजली संचालित मोटरों पर निर्भर है। ठप हुए हैंडपंप और मोटरें: बिजली के अभाव में वाटर पंप और जल प्रदाय प्रणालियां बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण भीषण धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर दूर-दराज के कुओं या अन्य स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: रात के समय अंधेरा छाए रहने से बच्चों की पढ़ाई ठप है। वहीं, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज न होने से ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क भी कटने की कगार पर है।


सोई, जौरा समेत इन गांवों में अंधेरा, ठप हुईं जरूरी सेवाएं

इस महा-ब्लैकआउट का असर क्षेत्र के सोई, जौरा, कमेरा, रावली, कल्याणपुर, बालेश्वर, देवपुरा समेत 20 से अधिक गांवों और मजरे-टोलों पर पड़ा है। "बिजली न होने से सिर्फ घरों में ही अंधेरा नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल के बैंक, डाकघर और सरकारी दफ्तरों का कामकाज भी पूरी तरह ठप हो गया है। कंप्यूटर और ऑनलाइन लिंक बंद होने से लोग पैसों के लेनदेन के लिए भटक रहे हैं। इसके अलावा आटा चक्की, वेल्डिंग दुकानें और छोटे घरेलू उद्योग बंद होने से कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।"

- स्थानीय निवासी, जौरा


33 केवी लाइन में फाल्ट; विभाग के दावों पर उठे सवाल

बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि यह संकट भिंड मुख्य ग्रिड से अटेर की ओर आने वाली 33 केवी (KV) हाईटेंशन लाइन में आई गंभीर तकनीकी खराबी के कारण पैदा हुआ है। विभाग का दावा है कि उनकी तकनीकी टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर फाल्ट सुधारने के प्रयास में जुटी हुई हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में बड़ी यांत्रिक गड़बड़ी होने के कारण शत-प्रतिशत सप्लाई बहाल करने में समय लग रहा है। दूसरी ओर, ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिजली विभाग के पास न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही वे काम में तेजी दिखा रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में मांग की है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर बिजली और पानी की सुचारू व्यवस्था नहीं की गई, तो प्रभावित गांवों के लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए विवश होंगे।