नई दिल्ली। चेतन आनंद का नाम देश के प्रमुख बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में लिया जाता है। चेतन ने अपनी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रदर्शन के दम पर एक बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में अपनी दमदार पहचान बनाई।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीतने वाले चेतन आनंद का जन्म 8 जुलाई 1980 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था। बचपन से ही चेतन की रुचि बैडमिंटन के साथ-साथ क्रिकेट में थी। शुरुआत में वह एक क्रिकेटर बनाना चाहते थे, लेकिन 9 वर्ष की उम्र में बैडमिंटन कोच भास्कर बाबू ने उनकी असल प्रतिभा को पहचाना। उनके मार्गदर्शन में चेतन ने पूरी तरह बैडमिंटन पर अपना ध्यान केंद्रित किया। शुरुआती दौर में चेतन ने डबल्स प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। वह 10 वर्ष की उम्र में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के उपविजेता बने। उन्होंने अंडर-12 व अंडर-15 राष्ट्रीय डबल्स खिताब जीता था।
डबल्स में उनके प्रदर्शन और लगातार सफलता को देखते को हुए भारतीय बैडमिंटन के दिग्गज प्रकाश पादुकोण ने उन्हें अपने मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया। पादुकोण का मार्गदर्शन मिलने के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली।
साल 2004 में चेतन ने पहली बार राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती। इसके बाद उन्होंने आयरिश ओपन और स्कॉटिश ओपन जैसे अंतरराष्ट्रीय खिताब भी अपने नाम किए। वर्ष 2006 उनके करियर का अहम पड़ाव रहा, जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल और मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीते। इसके बाद 2007, 2008 और 2010 में उन्होंने लगातार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर अपनी बादशाहत कायम रखी। वह ग्रां प्री टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय शटलर भी बने।
साल 2009 और 2010 में चेतन विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान तक पहुंचे, जो उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि रही। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक भी जीता। हालांकि, बाद के वर्षों में चोटों ने उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया।
बैडमिंटन से संन्यास के बाद चेतन ने 2014 में बैडमिंटन अकादमी की स्थापना की। अकादमी में वह युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करते हैं।
2006 में चेतन आनंद को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। करियर में तीन कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीते और चार बार राष्ट्रीय चैंपियन रहे चेतन अपने अकादमी के माध्यम से भारतीय बैडमिंटन के भविष्य निर्माण में सक्रिय हैं।



