बालाघाट, (रितेश सोनी)। बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक मधु भगत का एक बेहद विवादित बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघ के बढ़ते आतंक और हमलों की घटनाओं के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे विधायक ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक विशेष समुदाय के साथ मिलकर जंगली जानवरों का शिकार करने की बात कह डाली। विधायक ने खुले तौर पर चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो क्षेत्र के लोग हाथों में तीर-कमान थामेंगे और जंगली जानवरों का शिकार करेंगे, जिसमें वे खुद भी सबसे आगे खड़े नजर आएंगे।


एक सप्ताह में महिला की मौत और युवक गंभीर, ग्रामीणों में दहशत

दरअसल, बालाघाट जिले में कान्हा नेशनल पार्क के बफर क्षेत्र से लगे गांवों में इन दिनों बाघों की आवाजाही और हमलों से ग्रामीणों के बीच भारी दहशत का माहौल है। बीते एक सप्ताह के भीतर ही बाघ के हमले से एक महिला की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि ग्राम मालाखेड़ी का एक युवक बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया है। इसके अलावा चार अन्य ग्रामीणों को भी बाघ द्वारा खदेड़ने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीण आक्रोशित हैं।


वन अधिकारियों तक पहुँचाओ यह संदेश- विधायक ने जताई नाराजगी

हाल ही में हुए बाघ के हमले में घायल युवक से मुलाकात करने पहुँचे विधायक मधु भगत ने घटनास्थल का जायजा लिया और वन विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। विवादित बयान देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी बात वन विभाग के बड़े अधिकारियों तक पहुँचाना चाहते हैं। विधायक ने कहा कि यदि वन अमला ग्रामीण आबादी को सुरक्षा देने में नाकाम रहता है, तो ग्रामीण अपने पारंपरिक हथियार तीर-कमान से खुद सुरक्षा करेंगे और वे इस मुहिम में ग्रामीणों के साथ अग्रिम पंक्ति में रहेंगे।


बयान पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म

विधायक मधु भगत का यह विवादित बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। वन्यजीव प्रेमियों और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधि द्वारा जंगली जानवरों के शिकार का आह्वान करना और कानून हाथ में लेने की बात कहना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के नियमों के विपरीत है। अब देखना होगा कि इस वायरल बयान और बढ़ते बाघ के आतंक पर वन विभाग तथा प्रशासन क्या कड़ा रुख अपनाता है।