नई दिल्ली। भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले, लखनऊ में हुए फायरिंग की घटना, हिंदुत्व पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी, कश्मीर पर फारूक अब्दुल्ला के बयान और जामिया मिलिया इस्लामिया से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। पासवान ने कांग्रेस पर राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि खड़गे ने एक बार नहीं, बल्कि तीन बार आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। बिहार का निवासी होने के नाते उन्होंने इस पर हैरानी जताई और कहा कि बिहार की धरती पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री की दिवंगत माता के लिए अपशब्द कहे गए थे। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस से तत्काल माफी मांगने और स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक व्यवहार को अराजकता से जोड़ते हुए कहा कि नेताओं की भाषा का असर कार्यकर्ताओं पर भी पड़ता है।

राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में अदालत के फैसले पर पासवान ने कहा कि राहुल गांधी को लेकर कई कानूनी मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने उनकी तुलना कुछ आपराधिक मामलों में आरोपों का सामना कर चुके लोगों से करते हुए उनके रवैये की आलोचना की।

लखनऊ में हुई फायरिंग की घटना पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और सरकार दोषियों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में कानून-व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दिग्विजय सिंह की हिंदुत्व संबंधी टिप्पणी पर पासवान ने महर्षि वाल्मीकि जयंती का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण के रचयिता हैं और भाजपा उनके विचारों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह महर्षि वाल्मीकि के सम्मान में क्या कर रही है। पासवान ने सावरकर पर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों का भी जिक्र किया और कहा कि पार्टी को अपने नेताओं के बयानों में स्पष्टता रखनी चाहिए।

कश्मीर पर फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी की निंदा करते हुए पासवान ने दावा किया कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास कार्य बढ़े हैं और आतंकवादी घटनाओं में गिरावट आई है। उन्होंने अब्दुल्ला के बयान को असंवेदनशील बताते हुए उसकी आलोचना की।

जामिया मिलिया इस्लामिया से जुड़े घटनाक्रम और कांग्रेस सांसदों के खिलाफ एफआईआर पर पासवान ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं आंदोलन करती। सामाजिक न्याय और संविधान के सिद्धांतों को राजनीतिक हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए।