नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के महान पहलवान दारा सिंह ने अखाड़े के साथ अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। 'रुस्तम-ए-हिंद' दारा सिंह को भारत में फ्रीस्टाइल रेसलिंग को लोकप्रिय बनाने और उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय जाता है। 6 फुट 2 इंच की कद-काठी वाले दारा सिंह ने अपने 36 साल के करियर में 500 से ज्यादा पेशेवर कुश्तियां लड़ीं, जिसमें एक बार भी शिकस्त नहीं झेली। फिल्मों और टीवी धारावाहिक 'रामायण' में हनुमान की भूमिका निभाकर दारा सिंह घर-घर में लोकप्रिय हुए।

19 नवंबर 1928 को पंजाब के अमृतसर जिले में स्थित धरमचूक गांव में जन्मे दीदार सिंह रंधावा बचपन से ही अन्य बच्चों की तुलना में अधिक ताकतवर थे, उन्हें घी-दूध का काफी शौक था। महज 14 साल की उम्र में दारा सिंह की शादी बच्चू कौर से करवा दी गई। तीन साल बाद वह पिता बन गए।

परिवार बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ने लगा था। ऐसे में कमाई का जरिया खोजना जरूरी था। 127 किलो वजनी दारा सिंह की कद-काठी देखकर उन्हें सिंगापुर में एक ड्रम बनाने वाली कंपनी ने काम पर रख लिया। इसी फैक्ट्री में उनकी मुलाकात रेसलर हरनाम सिंह से हुई, जिन्होंने ट्रेनिंग लेकर रेसलिंग की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने दिग्गज पहलवानों के साथ रेसलिंग की।

53 इंच के सीने वाले दारा सिंह रोजना 2 लीटर दूध पीते थे। इसके अलावा आधा किलो मटन, 8-10 रोटियां, घी, बादाम और काजू-किशमिश उनकी खुराक का हिस्सा था। हालांकि, मेटाबॉलिज्म को मजबूत करने के लिए वह हफ्ते में एक दिन व्रत भी रखते थे।

विदेश में कुश्ती कर रहे दारा सिंह को हिंदी फिल्मों में भी काम मिलने लगा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म संगदिल (1952) से की। साल 1961 में उन्होंने सुरजीत कौर से दूसरी शादी कर ली।

साल 1962 में दारा सिंह का सामना वर्ल्ड चैंपियन किंग कॉन्ग से था। सभी सोच रहे थे कि ये भारतीय लड़का 200 किलो वजनी किंग कॉन्ग के सामने टिक भी नहीं सकेगा, लेकिन दारा सिंह ने सभी को दंग कर दिया। उन्होंने किंग कॉन्ग को अपने दोनों हाथों से हवा में उठाया और सीधे रिंग से बाहर पटक दिया।

साल 1959 में दारा सिंह ने पूर्व वर्ल्ड चैंपियन जॉर्ज गार्डियांका को हराकर कॉमनवेल्थ वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती। साल 1968 में दारा सिंह ने तीन बार के हैवीवेट चैंपियन लाऊ थेज को मात देकर वर्ल्ड चैंपियनशिप हासिल की।

80 के दशक में जब रामानंद सागर ने 'रामायण' टीवी शो बनाने का विचार किया, तो 'हनुमान' के रोल के लिए दारा सिंह का नाम सुझाया गया। इससे पहले दारा सिंह फिल्मों में भीम, भगवान शिव और बजरंग बली का किरदार निभा चुके थे। इस टीवी शो ने दारा सिंह को इतना मशहूर कर दिया कि लोग उन्हें भगवान का दर्जा देकर आशीर्वाद तक लेते थे। यूं तो दारा सिंह रोजाना मटन खाते थे, लेकिन भगवान हनुमान के रोल के लिए उन्होंने मांसाहार त्याग दिया था।

साल 1978 में उन्होंने 'दारा स्टूडियो' की नींव रखी। साल 1983 में कुश्ती से संन्यास ले लिया। इसके बाद साल 1998 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। राज्यसभा के लिए नॉमिनेट होने वाले पहले खिलाड़ी दारा सिंह साल 2003 से 2009 तक राज्यसभा में रहे।

7 जलाई 2012 को दारा सिंह हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए, जिसके बाद लो-ब्लड फ्लो के कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया। 12 जुलाई को दारा सिंह दुनिया को अलविदा कह गए। उन्हें 2018 में मरणोपरांत 'डब्ल्यूडब्ल्यूई हॉल ऑफ फेम' में शामिल किया गया।