भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का सियासी रण अब अपने सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यहाँ पल-पल बदलते समीकरणों के बीच शनिवार को एक साथ कई बड़े राजनैतिक घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस ने दतिया राजघराने के मुखिया और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा में टिकट कटने के बाद भड़के भारी आक्रोश को शांत करने के लिए भोपाल में मुख्यमंत्री और पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा के बीच बंद कमरे में एक बेहद हाई-प्रोफाइल बैठक हुई है। इसी बीच, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर ने अपने प्रत्याशी दामोदर यादव के पक्ष में दतिया के किला चौक पर एक विशाल जनसभा कर उपचुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। हालांकि, दतिया में बीते दिन हुए हिंसक पथराव और चक्काजाम के बाद जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) के चलते अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांत बनी हुई है।
मुख्यमंत्री और नरोत्तम मिश्रा के बीच बंद कमरे में महामंथन
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की घोषणा के बाद दतिया में भड़की भीषण बगावत और कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफों को थामने के लिए शनिवार को राजधानी भोपाल में एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ। मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा के बीच बंद कमरे में यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इस चर्चा के दौरान दतिया के नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने, उनके सामूहिक इस्तीफे वापस करवाने और पार्टी के घोषित उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर गहन मंथन हुआ। इसके साथ ही, भाजपा आलाकमान ने पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया का मुख्य चुनाव प्रभारी बनाकर अपनी मंसा साफ कर दी है कि वह इस सीट पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती।
भोपाल पहुंचे नरोत्तम मिश्रा ने तोड़ी चुप्पी- 'दिल का रिश्ता है, कार्यकर्ता मान जाएंगे'
टिकट कटने के बाद उपजे भारी घमासान के बीच पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा भोपाल पहुंचे, जहाँ उन्होंने मीडिया के तीखे सवालों का बेहद संयत होकर जवाब दिया और सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर डॉ। मिश्रा ने बेबाकी से स्वीकार करते हुए कहा, "हाँ, यह बिल्कुल सच है कि मैंने बी-फॉर्म (नामांकन पत्र) खरीदा है।" हालांकि, निर्दलीय लड़ने की संभावनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने मुस्कुराकर कहा, "हमारी कोई अलग रणनीति नहीं है, हम सिर्फ पार्टी का काम करेंगे महाराज। पार्टी जो भी निर्णय लेती है, वह बहुत अच्छा करती है और काफी दूर तक सोचकर करती है।"
दामोदर यादव बिगाड़ रहे अन्य बड़े दलों का गणित
भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रहे इस कड़े मुकाबले के बीच शनिवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने दतिया के किला चौक पर एक विशाल जनसभा कर अपनी ताकत का अहसास कराया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद विशेष रूप से दतिया पहुंचे। उन्होंने आजाद समाज पार्टी (ASP) के घोषित प्रत्याशी दामोदर यादव के समर्थन में किला चौक पर एक बड़ी हुंकार भरी। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद की इस धमाकेदार एंट्री ने दतिया के मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद कड़ा बना दिया है। आजाद समाज पार्टी यहां के दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकती है, जिसका सीधा और बड़ा असर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के चुनावी गणित पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल सभा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और सभा स्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।
दतिया में भारी पुलिस बल मुस्तैद, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
ज्ञात हो कि शुक्रवार शाम भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को टिकट दिए जाने और नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने की खबर के बाद दतिया में जमकर पथराव, चक्काजाम और पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें एसपी और एसडीओपी सहित 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद शनिवार सुबह प्रशासन ने एहतियातन पूरे दतिया जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी थी, जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इस कड़े प्रशासनिक रुख और भारी पुलिस बल के संवेदनशील इलाकों में किए गए फ्लैग मार्च के बाद अब दतिया में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांत बनी हुई है।




