धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के प्रसिद्ध एवं संवेदनशील भोजशाला (Dhar Bhojshala) स्थल से जुड़े नमाज़ के मुद्दे पर शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के दौरान एक नया प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय को नमाज़ अदा करने के लिए एक वैकल्पिक स्थान निर्धारित कर सूचित किया था।

हालांकि, प्रशासन द्वारा तमाम आवश्यक व्यवस्थाएं किए जाने के बावजूद तय किए गए वैकल्पिक स्थल पर नमाज़ी नमाज़ अदा करने नहीं पहुंचे। इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरे घटनाक्रम पर बारीक नज़र बनाए रहा और जिले में शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चौतरफा सतर्कता बरती गई।


40 पीर दरगाह पर प्रशासन ने की थी पूरी व्यवस्था

जिला प्रशासन ने अदालती आदेशों का पालन कराने के उद्देश्य से नमाज़ के लिए '40 पीर दरगाह' परिसर का चयन किया था। प्रशासन की ओर से यहाँ नमाज़ियों की सुविधा के लिए सुरक्षा, साफ-सफाई, वजू और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे, ताकि शांतिपूर्ण माहौल में इबादत पूरी हो सके।

प्रशासन का स्पष्ट कहना था कि वैकल्पिक स्थान का चयन माननीय न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही किया गया है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस वैकल्पिक स्थान पर नमाज़ पढ़ने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे अपने परंपरागत पुराने स्थान पर ही नमाज़ अदा करना चाहते हैं, जिसके चलते निर्धारित 40 पीर दरगाह पर नमाज़ आयोजित नहीं हो सकी।


संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात, अलर्ट पर रहा प्रशासन

जुमे की नमाज़ और भोजशाला की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस महकमा सुबह से ही पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। भोजशाला परिसर, उसके आसपास के क्षेत्रों तथा शहर के अन्य संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और थानों की पुलिस तैनात की गई थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या अफवाह को रोका जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहर के नागरिकों से शांति बनाए रखने और अदालत के फैसलों का सम्मान करने की अपील की। प्रशासन ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।


29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकी नजरें

इस पूरे मामले में मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि एवं सदर अब्दुल समद खान ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि 40 पीर दरगाह परिसर में नमाज़ अदा नहीं की जाएगी और उनकी मांग केवल पुराने निर्धारित स्थान को लेकर ही बनी हुई है।

अब इस मामले में सभी पक्षों की निगाहें 29 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में होने वाली आगामी महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत के रुख और फैसले के बाद ही भोजशाला में इबादत और पूजा की भावी व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।