भोपाल | मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में लगाए जा रहे 'स्मार्ट मीटर' की सटीकता और उपयोगिता को लेकर छिड़ी बहस के बीच अब प्रशासनिक महकमे के एक पूर्व बड़े अधिकारी ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व एडीएम (ADAM) विनोद कुमार चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर अपने साथ हुई बिजली बिल की गड़बड़ी को साझा करते हुए बिजली कंपनी पर करारा कटाक्ष किया है। एक रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से दर्ज कराई गई यह शिकायत दर्शाती है कि नई तकनीक के क्रियान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन) में आ रही विसंगतियों से आम जनता के साथ-साथ प्रबुद्ध वर्ग भी बुरी तरह परेशान है।
स्मार्ट मीटर लगते ही आया ₹9,999 का भारी-भरकम बिल
पूर्व एडीएम विनोद कुमार चतुर्वेदी ने फेसबुक (Facebook) पर अपनी एक पोस्ट के जरिए आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके घर में हाल ही में बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर लगाया गया था। मीटर लगने के बाद जो पहला मासिक बिल उनके हाथ में आया, उसे देखकर वे हैरान रह गए।
"मेरे घर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहला बिल ₹9,999 का आया है। जबकि इतिहास गवाह है कि अब तक का मेरा अधिकतम बिजली बिल कभी भी ₹2,000 से ज्यादा नहीं आया।"
- विनोद कुमार चतुर्वेदी, पूर्व एडीएम
इस अप्रत्याशित और पांच गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूर्व एडीएम ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि, "यानी हम वाकई 'स्मार्ट' बन गए हैं। मैंने फिलहाल इस विसंगति को लेकर बिजली विभाग के समक्ष अपनी आधिकारिक आपत्ति दर्ज करा दी है, अब देखते हैं कि विभाग अपनी इस तकनीकी चूक को स्वीकार करता है या नहीं।"
'स्मार्टफोन और स्मार्ट मीटर' के खेल में मीटर रीडर होंगे बेरोजगार
चतुर्वेदी ने इससे पहले भी गत 7 मई को अपने निवास पर स्मार्ट मीटर के इंस्टॉलेशन (लगाए जाने) के दौरान एक पोस्ट साझा कर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। तब उन्होंने मीटर की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए लिखा था कि, "धीरे-धीरे हम भी स्मार्ट होते जा रहे हैं—पहले स्मार्टफोन और अब यह स्मार्ट मीटर। इस नई तकनीक का जनता को क्या लाभ या हानि होगी, यह तो आने वाला वक्त (बिल) ही बताएगा; लेकिन एक बात तय है कि इसके आने से बिजली विभाग में आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे बड़ी संख्या में मीटर रीडर जरूर बेरोजगार हो जाएंगे।"
सटीकता और बिलिंग प्रणाली पर खड़े हुए बड़े सवाल
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई शहरों में पारंपरिक मीटरों को बदलकर तेजी से डिजिटल स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। विभाग का दावा है कि इससे रीडिंग में पारदर्शिता आएगी, लेकिन मैदानी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर लगते ही उनके बिलों में अचानक दो से पांच गुना तक का उछाल आ रहा है। अब एक पूर्व एडीएम स्तर के अधिकारी के घर आए इस त्रुटिपूर्ण बिल ने बिजली कंपनी के सॉफ्टवेयर, मीटरों की टेस्टिंग और पूरी बिलिंग प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि ऐसे दोषपूर्ण मीटरों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।


