नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल और तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर खिसकने और भीषण भूस्खलन के बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 633 पहुंच गई है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। इस प्राकृतिक त्रासदी में 320 भारतीय नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं और लगभग 400 भारतीय श्रद्धालु व पर्यटक तिब्बत क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
इस बीच, सीमावर्ती पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के मलबे से दो नई कृत्रिम झीलें (Barrier Lakes) बन गई हैं। इनमें से एक झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और दूसरी का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा सैलाब आने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। आपदा के पहले और बाद की सेटेलाइट तस्वीरों में भारी तबाही साफ नजर आ रही है। रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्लांट, त्रिशूली नदी घाटी और नेपाल के तिमुरे कस्बे में कई बहुमंजिला इमारतें, मुख्य सड़कें, कस्टम पोस्ट और पुल मलबे में तब्दील हो गए हैं। नुवाकोट जिले के देवीघाट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मकान 5 से 6 फीट कीचड़ और भारी बोल्डरों में दबे हुए हैं। तेज बहाव अपने साथ सैकड़ों वाहनों को बहा ले गया।
मलबे से बनी 2 झीलों से बढ़ा दोबारा जलप्रलय का संकट
वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, बुधवार को आए भीषण मलबे के बहाव ने नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे दो विशालकाय झीलें बन गई हैं। एक झील के ओवरफ्लो होने और रिसाव के कारण राहत व बचाव दलों को कई जगहों पर अस्थायी रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा है। यदि पानी के भारी दबाव से ये प्राकृतिक बांध टूटे, तो निचले रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और आगे भारत की सीमा से सटे इलाकों में पानी की एक और विनाशकारी लहर आ सकती है।
लापता लोगों में सैकड़ों विदेशी व भारतीय नागरिक
राहत व बचाव दल मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स और भारी मशीनों की मदद ले रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई जत्थे इस बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल और चीनी सीमा पर लापता 2,500 से अधिक लोगों में भारत के 320 नागरिकों के साथ-साथ अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया के पर्यटक भी शामिल हैं। भारत सरकार तिब्बत और नेपाल के विभिन्न शिविरों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए निरंतर संपर्क साधे हुए है।
नेपाल के राष्ट्रपति ने भारत की मदद के लिए जताया आभार
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए संकट की इस घड़ी में भारत द्वारा दिए गए त्वरित सहयोग, संवेदनशीलता और एकजुटता के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और भारत सरकार का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने में मित्र राष्ट्र भारत की तत्परता दोनों देशों के प्रगाढ़ और आत्मीय संबंधों का प्रतीक है।




