इटली/फ्रांस। भारतीय संस्कृति, योग और सनातन आध्यात्मिक परंपराओं को विदेशों में पहुंचाने के उद्देश्य से इटली के वेनिस प्रांत के पोर्टोग्रुआरो नगर में भक्ति योग एवं वैष्णव आध्यात्मिक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन मतंगेश्वर सेवा समिति खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के संयोजन में हुआ।


महोत्सव में झूलन-यात्रा, श्री बलराम पूर्णिमा एवं श्रील रूप गोस्वामी की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारतीय परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन हुआ। स्थानीय नागरिकों के साथ भारतीय मूल के श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडित सुधीर शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति अपनी आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जीवन दर्शन के कारण आज विश्वभर में लगातार लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गौरव का विषय है कि विदेशों में लोग योग, भक्ति और सनातन परंपराओं को अपनाने के लिए उत्सुक हैं।


उन्होंने कहा कि एक ओर विदेशी नागरिक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवनशैली को सम्मान के साथ अपना रहे हैं, वहीं भारत की नई पीढ़ी का एक वर्ग पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।


पंडित शर्मा ने भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के प्रसार में योगदान देने वाले संतों एवं आध्यात्मिक विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने पंडित देव प्रभाकर शास्त्री (दद्दा जी), पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री , आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य रजनीश (ओशो) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने अपने आध्यात्मिक कार्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।


महोत्सव के आयोजन में महाराजा रेस्टोरेंट ग्रुप के अरिकेश जोशी, कुरुकुमा ग्रुप के आसिफ खान, रफीक खान तथा इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता (फ्रांस) का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


भक्ति योग एवं वैष्णव आध्यात्मिक महोत्सव भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व के संदेश का प्रभावी माध्यम बना। आयोजन के माध्यम से विदेश की धरती पर भारतीय सनातन परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव का संदेश भी सामने आया।