भोपाल, जीतेन्द्र यादव। वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों में वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान शनिवार को एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। लगातार कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी महिला अभ्यर्थी अचानक बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे संभाला और आवश्यक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।


महिला अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठी हुई थी। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे अधिक संख्या में योग्य युवाओं को सरकारी नौकरी का अवसर मिल सके। लंबे समय से चले आ रहे इस आंदोलन में अनशनरत अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने की घटना ने प्रदर्शनकारियों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।


घटना की खबर फैलते ही आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य अभ्यर्थी और समर्थक चिंतित नजर आए। उन्होंने महिला अभ्यर्थी के स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों से तत्काल ध्यान देने की अपील की है। प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि उनकी मांगें जायज हैं और लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं। पदों की संख्या बढ़ाए बिना योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार मिलना मुश्किल हो रहा है।


अस्पताल में भर्ती महिला अभ्यर्थी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस घटना के बाद आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों पर अड़े रहने का संकल्प दोहराया है। वे कहते हैं कि जब तक वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों में वृद्धि नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। भोपाल में यह आंदोलन पिछले कुछ समय से चल रहा है और इसमें बड़ी संख्या में युवा अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।


महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने की घटना ने एक बार फिर इस बात की याद दिला दी है कि लंबे अनशन और आंदोलनों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कितने गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल परिवारजन और साथी अभ्यर्थी अस्पताल में उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं, जबकि आंदोलन स्थल पर मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जा रही है।