सतना/चित्रकूट। पावन तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी एक बार फिर पूरे उफान पर आ गई है। भाद्रपद मास के पहले ही दिन लगातार हुई करीब नौ घंटे की मूसलाधार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। नदी के अचानक बढ़े जलस्तर से प्रसिद्ध रामघाट सहित आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे गंभीर हालात निर्मित हो गए हैं।
रामघाट पर दुकानों में घुसा पानी, सड़कों पर चलती दिखीं नावें
मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रामघाट क्षेत्र में देखा गया। घाट किनारे संचालित होने वाली दर्जनों दुकानों, पूजा सामग्री के काउंटरों और प्रसाधन केंद्रों में पानी भर गया, जिसके चलते व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। रामघाट से जुड़ी गलियां और मुख्य सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई जगहों पर सड़कों पर नावें चलती दिखाई दीं।
प्रमुख धार्मिक स्थलों और परिक्रमा मार्ग पर जलभराव से आवागमन बाधित
भारी वर्षा के कारण धर्मनगरी के प्रमुख तीर्थ स्थलों—आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी और सती अनुसुइया आश्रम जाने वाले मार्गों पर पानी भर गया, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र 'कामदगिरि परिक्रमा मार्ग' पर पुरानी लंका तिराहे के समीप भारी जलभराव हो जाने से परिक्रमार्थियों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
जल निकासी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग
मानसून के दौरान मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष रामघाट और आसपास की निचली बस्तियों में जलभराव का संकट खड़ा होता है। स्थानीय निवासियों, पुजारियों और व्यापारियों ने प्रशासन से अपील की है कि बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को असुविधा व जनहानि से बचाया जा सके।




