दमोह। दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रसोटा से आस्था और मासूमियत की एक अनूठी व दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। शारदीय नवरात्रि में गांव में माता रानी की प्रतिमा स्थापित न होने से आहत दो दर्जन से अधिक बच्चे अपनी आराध्य के लिए सीधे सड़क पर उतर आए। वर्षों पुरानी परंपरा टूटने से नाराज मासूमों ने मुख्य तिराहे पर बैठकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता और बच्चों की धार्मिक भावनाओं को समझते हुए हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने मिसाल पेश की। उन्होंने न केवल बच्चों से संवाद कर उन्हें मनाया, बल्कि पुलिस परिवार की ओर से माता रानी की प्रतिमा भेंट कर उनकी आस्था का सम्मान किया।
ग्राम रसोटा के ब्राह्मण मोहल्ला स्थित अथाई तिराहे पर पिछले करीब 16 वर्षों से नवरात्रि में पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बच्चे उत्सव की तैयारियों की राह देख रहे थे। नवरात्रि के पहले दिन देर रात तक जब कोई तैयारी नहीं दिखी, तो बच्चों को पता चला कि इस वर्ष कृषि कार्य और फसलों की कटाई में अत्यधिक व्यस्तता के चलते बड़ों ने प्रतिमा स्थापना न करने का निर्णय लिया है। 16 साल की इस परंपरा के रुकने की बात मासूमों को रास नहीं आई।
निराश और क्षुब्ध होकर दूसरे दिन सुबह दो दर्जन से अधिक बालक-बालिकाएं एकजुट होकर गांव के मुख्य तिराहे पर पहुंच गए और जमीन पर धरने पर बैठ गए। बच्चों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और खेतों की ओर जा रहे ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों को रोककर अपनी मांग के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। सड़क पर बच्चों की इस भावनात्मक जिद ने हर राहगीर और ग्रामीण को सोचने पर मजबूर कर दिया। बच्चों का कहना था कि जब 16 वर्षों से माता रानी विराजती आ रही हैं, तो इस बार यह परंपरा किसी भी कीमत पर खंडित नहीं होनी चाहिए।
सड़क पर मासूमों के जाम और विरोध-प्रदर्शन की सूचना मिलते ही हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी हरकत में आए। उन्होंने मौके पर पुलिस बल भेजा और पहले फोन पर बच्चों से स्नेहपूर्वक बात की। इसके बाद बच्चों के प्रतिनिधिमंडल को थाने बुलाकर आत्मीय संवाद किया गया। थाना प्रभारी ने बच्चों की निश्छल भक्ति का आदर करते हुए पुलिस परिवार की तरफ से माता रानी की प्रतिमा उपलब्ध कराई और पूरे आदर-सत्कार के साथ स्थापना का आश्वासन दिया। प्रतिमा मिलते ही बच्चों के चेहरे खिल उठे, उन्होंने 'जय माता दी' के जयकारे लगाए और तत्काल अपना धरना समाप्त कर दिया। खाकी का यह मानवीय और संवेदनशील चेहरा पूरे अंचल में चर्चा और प्रशंसा का विषय बना हुआ है।













