पन्ना/अजयगढ़, मोहम्मद मुस्तकीम। सरकारी गौशालाओं में अव्यवस्थाओं और बजट के दुरुपयोग की शिकायतों के बीच अजयगढ़ तहसील मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भानपुर में संचालित कान्हा गौशाला में जमीनी स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। मध्य प्रदेश की बड़ी सरकारी गौशालाओं में शामिल इस गौशाला की क्षमता करीब 1000 गायों की है और वर्तमान में क्षमता के मुताबिक करीब 1000 गायें मौजूद हैं।


करीब तीन एकड़ में संचालित गौशाला में गायों के खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गौशाला संचालक संतोष यादव ने ग्राउंड जीरो पर गौशाला की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि गायों को समय-समय पर हरी घास, निर्धारित मात्रा में पशु आहार, दाना, भूसा और साइलेज उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बारिश के मौसम में भी गायों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।


गौशाला में गायों की देखरेख और सेवा के लिए करीब 13 कर्मचारी तैनात हैं। पूरे गौशाला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से संचालक लगातार निगरानी रखते हैं। गायों के स्वास्थ्य की जांच और उपचार के लिए पशु चिकित्सक की व्यवस्था भी की गई है। समय-समय पर गायों का टीकाकरण किया जाता है और बीमारी की स्थिति में उपचार की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।


गर्मी और बारिश के मौसम को देखते हुए गौशाला में गायों के लिए पंखे और पर्याप्त पानी की व्यवस्था भी की गई है। गौशाला में अच्छी नस्ल की गायें भी मौजूद हैं, जिससे दूध और घी का उत्पादन हो रहा है। संचालक के मुताबिक गौशाला से प्रतिदिन करीब 150 लीटर शुद्ध दूध के साथ देसी घी और बड़ी मात्रा में गोबर खाद भी प्राप्त हो रही है।


गौशाला संचालक संतोष यादव का कहना है कि वह लगन और मेहनत के साथ निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा कर रहे हैं। उनका कहना है कि गौ सेवा से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ मानसिक सुकून भी मिलता है। उन्होंने कहा कि गौशाला की व्यवस्थाएं कोई भी व्यक्ति आकर देख सकता है।


हालांकि, 1000 गायों की क्षमता के लिहाज से करीब तीन एकड़ का परिसर सीमित है। गौशाला के लिए आवंटित गोचर भूमि पर लोगों द्वारा कथित तौर पर अवैध कब्जा किया गया है। इसके चलते गायों के घूमने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। संचालक का कहना है कि यदि प्रशासन गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर गौशाला के सुपुर्द कर दे तो गायों के लिए और बेहतर व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।