नई दिल्ली। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और अर्बन कंपनी जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए खुशखबरी है। अब वे भी केवल 99 रुपए के छोटे से योगदान से शुरुआत कर नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के जरिए रिटायरमेंट के लिए फंड बना पाएंगे। यह जानकारी बुधवार को पीएफआरडीए की ओर से दी गई। एनपीएस का प्रबंधन करने वाली सरकारी एजेंसी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एनपीएस फ्रेमवर्क के लचीलेपन के बारे में बताया। रेगुलेटर ने कहा कि वर्कर्स 99 रुपए से योगदान शुरू कर सकते हैं और अपनी गति से निवेश जारी रख सकते हैं, क्योंकि इसमें योगदान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं है।

पोस्ट में आगे कहा गया कि आपका काम बेशक, आपकी अगली बुकिंग पर निर्भर करता है, लेकिन आपका रिटायरमेंट नहीं। साथ ही लिखा कि प्लेटफर्म वर्कर्स एनपीएस के तहत केवल 99 रुपए के योगदान से शुरुआत कर सकते हैं। इसमें अधिकतम या न्यूनतम योगदान की कोई सीमा नहीं है।

एनपीएस ई-श्रमिक (प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर) मॉडल को पीएफआरडीए ने 29 अक्टूबर, 2025 के एक सर्कुलर के जरिए शुरू किया था, ताकि गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को एनपीएस फ्रेमवर्क के दायरे में लाया जा सके। यह मॉडल उन लोगों के लिए है जो सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स को सेवाएं देते हैं।

इस फ्रेमवर्क के तहत, योगदान प्लेटफॉर्म और वर्कर मिलकर कर सकते हैं, सिर्फ वर्कर कर सकता है, या फिर वर्कर की ओर से पूरी तरह से प्लेटफॉर्म या एग्रीगेटर कर सकता है। हालांकि, पीएफआरडीए ने योगदान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं की है, लेकिन वर्कर और प्लेटफॉर्म आपसी सहमति से हर योगदान के लिए न्यूनतम राशि तय कर सकते हैं।

यह मॉडल मोटे तौर पर एनपीएस कॉर्पोरेट मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे खास तौर पर प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए बनाया गया है। अहम बात यह है कि प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स को पीएफआरडीए के साथ अलग से रजिस्टर करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, एनपीएस अकाउंट खोलने और उससे जुड़ी सेवाएं देने वाले 'पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस' (पीओपी) अपने वर्करों को एनरोल करने के लिए एग्रीगेटर्स के साथ समझौता कर सकते हैं।

ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में, वर्कर की केवासी जानकारी - जैसे नाम, पता, पेन, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट की जानकारी - इकट्ठा की जाती है। केवाईसी को आधार-आधारित ई-केवाईसी या पीएफआरडीए द्वारा मंजूर किसी अन्य तरीके से पूरा किया जा सकता है।

वर्कर की सहमति मिलने के बाद, एक 'परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर' जेनरेट किया जाता है। शुरुआती चरण में, प्लेटफॉर्म वर्कर के लिए इन्वेस्टमेंट स्कीम और पेंशन फंड चुन सकता है। हालांकि, अकाउंट खुलने के बाद वर्कर के पास इन विकल्पों को बदलने का अधिकार होता है।