भोपाल। मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने वाली राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली बहना योजना' के तीन साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर मोहन यादव सरकार योजना के जमीनी असर का व्यापक मूल्यांकन (Impact Audit) करा रही है। सरकार का उद्देश्य यह जानना है कि इस पहल से राज्य की महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन स्तर और स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्या सकारात्मक बदलाव आए हैं।


समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति

योजना के विस्तृत विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए पांच प्रमुख विभागों के शीर्ष अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति ठीक एक महीने के भीतर अपनी ऑडिट रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग। लोक निर्माण विभाग (PWD) और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD-कार्मिक)। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को भी इस मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ा गया है।


जन-संवाद और प्रत्यक्ष फीडबैक

मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत राज्यभर में लाभार्थियों से सीधा संवाद किया जा रहा है। इसी कड़ी में धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने भी जमीनी स्तर पर लाभार्थियों से चर्चा कर योजना से जुड़े प्रत्यक्ष अनुभव और प्रतिक्रियाएं जुटाई हैं।


1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिल रही आर्थिक मदद

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में गेम-चेंजर साबित हुई इस योजना के तहत राज्य सरकार वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में ट्रांसफर कर रही है। इतनी बड़ी वित्तीय सहायता से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्थानीय बाजारों पर पड़े प्रभाव का आकलन करना भी इस अध्ययन का मुख्य हिस्सा है।