सूरत। गुजरात के शहर सूरत में रविवार को एक दिवसीय आयुर्वेदिक सम्मेलन 'वंदे आयुकोन-26' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद को बढ़ावा देने व इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सूरज के सरथाणा स्थित कन्वेंशन डोम में रविवार को यह राज्य स्तरीय एक दिवसीय आयुर्वेदिक सम्मेलन आयोजित किया गया। गुजरात आयुर्वेदिक काउंसिल के अध्यक्ष जिग्नेश पटेल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि प्रदेश भर से 1200 से अधिक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

​अपने संबोधन में संघवी ने औपचारिकता और मंच पर फूल-मालाओं के लंबे समय तक चलने वाले स्वागत समारोह से हटकर काम की बात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अक्सर कार्यक्रमों में केवल स्वागत-सत्कार और नामों के उल्लेख में ही 10-15 मिनट का समय बीत जाता है। अगर हम इस समय की बचत करें तो उस दौरान जनस्वास्थ्य और आयुर्वेद के विकास से जुड़े गंभीर और महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस में केवल समस्याओं या 50 प्रश्नों की सूची बनाने के बजाय उनके व्यावहारिक समाधान ढूंढने पर जोर दें। अगर हम 2-5 प्रमुख सुझावों के ठोस समाधान पर काम करें, तो हम क्षेत्र में वास्तविक सुधार ला सकते हैं। सरकार आपके साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करने को तैयार है।

हर्ष संघवी ने उपस्थित वैद्यों और डॉक्टरों का आह्वान किया कि वे सम्मेलन के दौरान दिनभर चलने वाले विभिन्न सत्रों में से मुख्य निष्कर्ष और समाधान निकालें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सम्मेलन समाप्त होने के बाद समस्याओं के निस्तारण के लिए वे डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल को राज्य सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिठाएंगे ताकि उन पर त्वरित अमल किया जा सके।

​उन्होंने डॉक्टरों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग एक टीम की तरह आयुर्वेदिक चिकित्सकों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि राज्य में पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके।