बालाघाट, रितेश सोनी । बालाघाट मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत कनकी में सांसद निधि से स्वीकृत पानी के टैंकर को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की अनुमति के बिना उनकी सील और हस्ताक्षर का उपयोग कर टैंकर की डिलीवरी से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए। इतना ही नहीं, टैंकर पंचायत में पहुंचने से पहले ही उसकी जियो टैग फोटो अपलोड किए जाने का भी दावा किया जा रहा है।

टैंकर पहुंचा नहीं, फिर कैसे तैयार हुआ डिलीवरी चालान?

मामले के अनुसार, बालाघाट-सिवनी सांसद भारती पारधी की सांसद निधि से ग्राम पंचायत कनकी के लिए पानी का टैंकर स्वीकृत किया गया था। पंचायत पदाधिकारियों के अनुसार, 30 सितंबर को सांसद कार्यालय के PA द्वारा कनकी पंचायत सचिव से फोन पर टैंकर प्रदाय के संबंध में जानकारी ली गई। सचिव ने कथित तौर पर टैंकर पंचायत में नहीं पहुंचने की जानकारी दी और इसकी सूचना सरपंच को भी दी गई।

पंचायत की ओर से दावा किया गया है कि उसे टैंकर का कोई अधिकृत डिलीवरी चालान प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद दस्तावेजों में टैंकर पंचायत को सुपुर्द किए जाने की स्थिति दर्शाए जाने का आरोप है।

5 जुलाई की जियो टैग फोटो ने खड़े किए सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल उस जियो टैग फोटो को लेकर उठ रहा है, जिसे कथित तौर पर 5 जुलाई 2026 को दोपहर 2:40 बजे ग्राम कनकी की लोकेशन पर अपलोड किया गया। पंचायत पदाधिकारियों का कहना है कि उस समय टैंकर वास्तव में ग्राम पंचायत कनकी में मौजूद नहीं था।


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यदि दस्तावेज और जियो टैग फोटो सही पाए जाते हैं तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि टैंकर की वास्तविक लोकेशन क्या थी और फोटो किस माध्यम से तथा किसके द्वारा अपलोड की गई।

सरपंच-सचिव की सील और हस्ताक्षर के दुरुपयोग का आरोप

कनकी सरपंच दुर्गा प्रसाद पगरवार का आरोप है कि उनके और पंचायत सचिव के नाम की सील तथा हस्ताक्षर की डुप्लीकेट कॉपी का इस्तेमाल किया गया है। सरपंच ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच का कहना है कि पंचायत की अनुमति के बिना यदि उनकी सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने शासन-प्रशासन के साथ सांसद से भी मामले की उचित जांच कराने की मांग की है।

मामला सामने आने के बाद अचानक कनकी पहुंचा टैंकर

मामले में नया मोड़ तब आया, जब पंचायत स्तर से शिकायत और मामले की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद 3 सितंबर 2026 को एक पानी का टैंकर कनकी में दिखाई दिया। ग्रामीणों और पंचायत के पंचों के अनुसार, यह टैंकर इसी दिन ग्राम पंचायत में पहुंचा।

जानकारी जुटाने पर सामने आया कि टैंकर को सागर जिले के खुरई क्षेत्र से भेजे जाने की बात कही जा रही है। टैंकर पर पानी की मोटर, नामांकित पेंटिंग और सांसद भारती पारधी का बैनर-स्टिकर लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पंचायत से जुड़े लोगों के अनुसार टैंकर को 2 सितंबर की शाम करीब 4 बजे कनकी के लिए रवाना किया गया और 3 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे वहां पहुंचा।

यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दस्तावेजों में कथित तौर पर इसे 5 जुलाई 2026 को ही पंचायत को सुपुर्द किया जाना दर्शाया गया था।

सरपंच ने अब तक नहीं लिया टैंकर का हैंडओवर

सरपंच और पंचायत के पंचों का कहना है कि पूरे मामले की जांच होने तक उन्होंने टैंकर का आधिकारिक हैंडओवर नहीं लिया है। उनका कहना है कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि टैंकर की डिलीवरी कब हुई, डिलीवरी दस्तावेज किसने तैयार किए, जियो टैग फोटो किसने अपलोड की और पंचायत पदाधिकारियों की सील एवं हस्ताक्षर का कथित रूप से इस्तेमाल कैसे हुआ।

जांच के दायरे में ये सवाल

इस पूरे मामले में अब कई सवाल जांच की मांग कर रहे हैं—

  • पंचायत में टैंकर पहुंचने से पहले डिलीवरी दस्तावेज कैसे तैयार हुए?
  • 5 जुलाई की जियो टैग फोटो किसने और किस आधार पर अपलोड की?
  • सरपंच और सचिव की कथित डुप्लीकेट सील किसने तैयार की?
  • दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर वास्तविक हैं या उनकी नकल की गई?
  • टैंकर की वास्तविक डिलीवरी की तारीख और स्थान क्या है?
  • सांसद निधि से संबंधित भुगतान या बिल प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया?
  • पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही या कथित अनियमितता हुई?

सरपंच ने FIR और निष्पक्ष जांच की मांग की

कनकी सरपंच दुर्गा प्रसाद पगरवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ FIR सहित कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों की सील और हस्ताक्षर का दुरुपयोग हुआ है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है।

वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आया है कि मामले को पंचायत स्तर पर निपटाने के लिए सरपंच पर दबाव बनाया जा रहा है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

फिलहाल पूरे मामले में टैंकर की वास्तविक आपूर्ति, दस्तावेजों की सत्यता, जियो टैग फोटो और कथित फर्जी सील-साइन की जांच महत्वपूर्ण होगी। संबंधित विभाग और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और जमीनी स्थिति में अंतर क्यों था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।