मुंबई। अभिनेत्री स्मृति खन्ना ने दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत को भावुक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साथ बिताए खूबसूरत पलों को याद किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों की दुनिया से शुरू हुई पहचान धीरे-धीरे एक ऐसे रिश्ते में बदल गई, जो परिवार जैसा बन गया था। वह हमेशा उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाते थे।आईएएनएस से खास बातचीत में स्मृति खन्ना ने कहा, ''मेरी पहली मुलाकात प्रदीप दादा से एक पार्टी में हुई थी। हम एक दोस्त के जरिए मिले थे। पहली मुलाकात में ही हमारे बीच अच्छा जुड़ाव बन गया। इसके बाद हमारी दोस्ती लगातार मजबूत होती गई और धीरे-धीरे यह एक खूबसूरत पारिवारिक रिश्ते में बदल गया। प्रदीप दादा, उनकी पत्नी कल्याणी और हमारा पूरा परिवार अक्सर साथ समय बिताया करता था।''

स्मृति ने आगे बताया कि दोनों परिवारों के बीच इतना अपनापन था कि एक-दूसरे के घर आना-जाना, साथ बैठकर खाना खाना, जन्मदिन मनाना और छुट्टियों पर जाना आम बात थी। हम एक-दूसरे के घर जाया करते थे। जन्मदिन साथ मनाते थे, रात के खाने पर मिलते थे और कई बार देर रात तक बैठकर बातें करते थे। छुट्टियां भी हमने साथ बिताईं। मेरे जन्मदिन पर प्रदीप दादा हमेशा मौजूद रहते थे। हम घंटों तक अंताक्षरी खेलते थे, हंसते थे और खूब बातें करते थे। उनके साथ बिताया गया हर पल आज भी मेरी यादों में ताजा है।''

स्मृति ने कहा, ''प्रदीप रावत केवल अच्छे अभिनेता ही नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से भरपूर इंसान भी थे। वह अक्सर अपने संघर्ष, काम और जिंदगी से जुड़े किस्से सुनाते थे, जिनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। उनकी हर बात में सीख होती थी। हमारे बीच स्नेहभरा रिश्ता था। वह कभी मुझे अपनी छोटी बहन की तरह मानते थे तो कभी बेटी की तरह। उन्होंने हमेशा प्यार, सम्मान और अपनापन दिया।''

उन्होंने कहा, ''प्रदीप दादा की हाजिरजवाबी कमाल की थी। वह बिना किसी कोशिश के लोगों को हंसा देते थे। उनकी बातें सभी को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देती थी। उनमें ऐसी एनर्जी थी कि उनके आते ही पूरा माहौल बदल जाता था। यही बात उन्हें सबसे अलग बनाती थी।''

स्मृति ने बताया, ''उन्होंने मेरे अभिनय करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह हमेशा मुझे सही सलाह देते थे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। वह कहते थे कि मेहनत करते रहो। उन्होंने कुछ लोगों को मेरा नाम भी सुझाया। यह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी कि वह हमेशा चाहते थे कि उनके आसपास के लोग आगे बढ़ें और सफल हों।''

अभिनेत्री ने प्रदीप रावत के अभिनय की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, ''प्रदीप दादा एक असाधारण अभिनेता थे। चाहे उन्हें खलनायक का किरदार मिला हो या किसी गंभीर भूमिका, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी पर्दे पर मौजूदगी इतनी प्रभावशाली होती थी कि उनका हर किरदार यादगार बन जाता था।''

स्मृति ने कहा, ''कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद प्रदीप दादा ने काम के प्रति कभी लापरवाही नहीं दिखाई। उन्होंने शूटिंग जारी रखी और अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाया। मैंने हमेशा उनकी हिम्मत और समर्पण की सराहना की है। वह वास्तव में बेहद साहसी इंसान थे। उनका जीवन और उनका संघर्ष हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।''