नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड 10 साल बाद साउथ अफ्रीका लौट रहे हैं। उन्होंने 2016 में इस अफ्रीकी देश में अपना आखिरी वनडे मैच खेला था और अब वे प्रोटियाज (साउथ अफ्रीका) के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए तैयारी कर रहे हैं। बोलैंड का कहना है कि वह उम्र बढ़ने के साथ अब चाहते हैं कि उनका करियर लंबा चले और वह इसके लिए अपनी ट्रेनिंग और समय को बेहतर ढंग से प्लान करने पर ध्यान दे रहे हैं।बोलैंड टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं और शायद ही किसी को याद हो कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए वनडे और टी20 इंटरनेशनल मैच भी खेले हैं। वे खुद कहते हैं कि उन्हें 2016 में साउथ अफ्रीका के वनडे दौरे के बारे में कुछ भी याद नहीं है। बोलैंड ने गुरुवार को कहा, "मुझे कुछ भी याद नहीं है। सच कहूं तो, मुझे पता है कि मैदान पर हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। हमारा बॉलिंग अटैक बहुत अनुभवहीन था। मगर उसके अलावा, मुझे कुछ भी याद नहीं है। मुझे याद नहीं कि हम कहां थे। मुझे नहीं पता कि मैंने उस याद को भुला दिया है, क्योंकि वह दौरा अच्छा नहीं रहा था। हालांकि, मुझे लगता है कि 10 साल का समय बहुत लंबा होता है।"

बोलैंड ने पांच मैचों की उस सीरीज में तीन वनडे खेले थे, जिसमें 2015 की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को प्रोटियाज के हाथों 0-5 से हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलियाई टीम को मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंस जैसे खिलाड़ियों की कमी खली थी, क्योंकि बोलैंड ने जॉन हेस्टिंग्स, क्रिस ट्रेमेन, जो मेनी और डैन वॉरल के साथ गेंदबाजी की थी।

अब वे पहले की तुलना में कहीं बेहतर महसूस करते हुए साउथ अफ्रीका लौट रहे हैं। बोलैंड ने कहा, "मैंने अपने काम करने के तरीके या गेंदबाजी करने के तरीके में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया है। मगर मुझे लगता है कि सबसे बड़ा बदलाव मैचों की तैयारी, अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने और छोटी-छोटी चीजों को सही करने में आया है।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि दस साल पहले मैंने शायद जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग की थी और मैचों में खासकर सीरीज के आखिरी हिस्से में थकान के साथ उतरता था। मुझे लगता है कि अब जाहिर है कि उम्र बढ़ने के साथ मैं चाहता हूं कि मेरा करियर जितना हो सके उतना लंबा चले। इसी कारण मैं अपनी ट्रेनिंग के तरीके और समय को बेहतर ढंग से प्लान कर रहा हूं, ताकि सीरीज के आखिर तक मुझमें थोड़ी एनर्जी बची रहे। इसके साथ ही, मुझे लगता है कि अब मैं अपने खेल को कहीं बेहतर ढंग से समझता हूं।"

ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ने कहा, "मुझे लगता है कि कई खिलाड़ी कहते हैं कि उम्र बढ़ने पर उन्हें काश पता होता कि उन्होंने क्या किया था। 37 साल की उम्र में मेरे साथ भी ऐसा ही है। अगर मुझे 27 साल की उम्र में वो पता होता जो मुझे अब पता है, तो शायद मैं बेहतर प्रदर्शन कर पाता।"

बोलैंड ने बांग्लादेश टेस्ट से पहले आठ हफ्ते तक तैयारी की थी लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। साउथ अफ्रीका जाने से पहले उन्हें दो हफ्ते का आराम दिया गया और फिर विक्टोरिया के लिए न्यू साउथ वेल्स के खिलाफ 50 ओवर के मैच के लिए तीन हफ्ते तक बॉलिंग की प्रैक्टिस की।

बोलैंड ने कहा, "उस सीरीज के बाद मैं दो हफ्ते तक बॉलिंग नहीं करना चाहता था। मुझे लगा कि मैं वहां नेट्स और सेंटर विकेट पर बहुत अच्छी बॉलिंग कर रहा था। इसी वजह से जब वह मौका निकल गया और मैंने अपने री-लोड पर ध्यान दिया, तो मुझे पता था कि रविवार को जाने से पहले इस समय मुझे लगभग 10-12 ओवर बॉलिंग करनी होगी, इसलिए मुझे लगता है कि यह मैच बहुत सही रहा।"