उमरिया, तपस गुप्ता। बांधवगढ़ से अचानकमार तक फैले बाघों के प्राकृतिक गलियारे के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को मिल रही मंजूरियों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। उमरिया जिले में प्रस्तावित वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से सवाल किए हैं। पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर पूछा कि बाघों की आवाजाही के महत्वपूर्ण कॉरिडोर के आसपास लगातार खनन परियोजनाओं को मंजूरी किस आधार पर दी जा रही है।
बताया गया है कि प्रस्तावित परियोजना बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर से करीब 6 किलोमीटर दूर है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 8 और 9 सितंबर को हुई बैठकों में परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की गई है। इससे पहले भी कॉरिडोर के आसपास पाथोरा ईस्ट, मरवाटोला VII और अर्जुनी वेस्ट जैसी खनन परियोजनाएं पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुकी हैं। इनमें एक परियोजना कॉरिडोर से महज 53 मीटर की दूरी पर बताई गई है।
यह भी पढि़ए: शराब दुकान पर उपद्रवियों का तांडव:थाने से महज 600 मीटर दूर ठेके में घुसकर बोतलें फोड़ीं और कर्मचारियों को पीटा, बोलेरो भी क्षतिग्रस्त
1,400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रस्तावित खदान
रिपोर्टों के अनुसार वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन का खनन लीज क्षेत्र 1,400 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 960 हेक्टेयर से ज्यादा वनभूमि शामिल है। परियोजना भूमिगत खनन पर आधारित है। पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी शर्तों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
NTCA की चिंताओं का दिया हवाला
जीतू पटवारी ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से जुड़े संरक्षण संबंधी दस्तावेजों का हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बांधवगढ़-अचानकमार क्षेत्र को महत्वपूर्ण बाघ आबादी वाले क्षेत्रों को जोड़ने वाले प्राकृतिक गलियारे के रूप में बताया जाता है। ऐसे गलियारे बाघों की आवाजाही और आबादी के बीच संपर्क बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से NTCA से संबंधित रिपोर्ट और सरकार की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। अब इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित विभाग के जवाब का इंतजार है। मुख्य सवाल यही है कि क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों के साथ बाघों के प्राकृतिक आवागमन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन किस तरह कायम रखा जाएगा।











