नई दिल्ली। पीतांबर पब्लिशिंग कंपनी ने प्रख्यात शिक्षाविद् और लेखक अशोक के. पांडे की पुस्तक 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन के उपलक्ष्य में 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' में नेतृत्व, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण पर राष्ट्रीय संवाद 'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026' का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस मंच ने भारत में शिक्षा के भविष्य पर गहन चर्चा के लिए प्रख्यात शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, शासन विशेषज्ञों और नागरिक समाज के सदस्यों को एक साथ लाने का काम किया। एक पारंपरिक पुस्तक विमोचन के बजाय एक बौद्धिक संवाद के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के शैक्षिक परिदृश्य को आकार देने में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए अशोक के. पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और नेतृत्व से प्रेरित होने के बाद, 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' कोई जीवनी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक सार्वजनिक जीवन से प्राप्त शैक्षिक, संस्थागत और नेतृत्व संबंधी पाठों का विश्लेषण करते हुए एक चिंतनशील कृति है। यह भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर सार्थक चर्चाओं को प्रोत्साहित करती है।
इस चर्चा का केंद्र बिंदु 'भारत को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए हमारे स्कूलों में किस प्रकार के नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहिए?' रहा। वक्ताओं ने एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा, कक्षाओं में नवाचार, चरित्र निर्माण, आलोचनात्मक सोच और छात्रों में जिम्मेदार नेतृत्व के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा को केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित न रहकर, सत्यनिष्ठा, दृढ़ता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की प्रबल भावना से युक्त जिम्मेदार नागरिकों का पोषण करना चाहिए। मंच ने तेजी से विकसित हो रहे राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली शिक्षा प्रणाली के निर्माण में शिक्षकों, नीति निर्माताओं और संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया।
'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन को शिक्षा और नेतृत्व पर राष्ट्रीय चर्चा में एक सामयिक योगदान के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसके बाद प्रतिभागियों ने भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार नेताओं को पोषित करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
शिक्षाविद और लेखक अशोक के. पांडे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आज का कार्यक्रम, 'इग्नाइटिंग माइंड्स फोरम', मुख्य रूप से एक ही विषय पर केंद्रित था: नेतृत्व का विकास कैसे किया जा सकता है, नेतृत्व को पाठ्यक्रम का हिस्सा कैसे बनाया जा सकता है, और शिक्षण संस्थानों में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच इस गुण को कैसे पोषित किया जा सकता है। हम अतीत की बात नहीं कर रहे हैं, हम 2047 के एक विकसित भारत की बात कर रहे हैं। एक ऐसा भारत जो समृद्ध हो, अपनी जड़ों और विरासत का ख्याल रखे, अपनी विविधताओं का सम्मान करे, और चरित्र और ईमानदारी के आधार पर प्रत्येक नागरिक को समाज में एक गरिमापूर्ण स्थान प्रदान कर सके। आज की चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि उस परिकल्पना को साकार करने में शिक्षा क्या भूमिका निभा सकती है।
पैन आईआईटी एलुमनाई इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. अमिताभ रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आज का कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा। 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' नेतृत्व पर आधारित एक पुस्तक है और यह बताती है कि प्रधानमंत्री मोदी से नेतृत्व कैसे सीखा जा सकता है। उनके हर कार्य में नेतृत्व के कुछ गुण झलकते हैं..." उन्होंने कहा कि इस किताब में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कैसे लीडरशिप को सीखा जा सकता है। उनकी हर गतिविधि जैसे निष्काम कर्म, कर्मयोगी और सामुदायिक विकास समेत कई चीजें सीखी जा सकती हैं। इस तरह से हम स्कूल में एक ऐसा पाठ्यक्रम शामिल करना चाहते हैं, जिसमें छात्रों का सर्वांगीण विकास हो, क्योंकि हमें छात्रों में नेतृत्व की भावना को विकसित करना है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश है कि हर 1.4 बिलियन पॉपुलेशन को सशक्त करना है, क्योंकि अभी पूरा माहौल हमारे पक्ष में है और 2055 तक हमारे पास 65 लाख की आबादी वर्किंग होगी, इसलिए हमें उनको तैयार करना है, ताकि वे राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकें।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल पीके सहगल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह सेमिनार बहुत उच्च कोटि का था। इसमें कम से कम 30, 40 या 50 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनका राष्ट्र निर्माण और शिक्षा में योगदान असाधारण रूप से उच्च कोटि का रहा है। यह सत्र डॉ. अशोक पांडे के प्रयासों से आयोजित किया गया था। डॉ. अशोक पांडे ने 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' नामक पुस्तक लिखी है। वास्तव में, यह पुस्तक आम जनता, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं उन्हें ऐसे मंच के आयोजन के लिए बधाई देता हूं, जिसके माध्यम से नेतृत्व, स्कूली शिक्षा, राष्ट्र निर्माण और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
यहूदा हयाम सिनेगॉग के सचिव डॉ. रब्बी ईजेकील इसहाक मालेकर ने कहा कि युवाओं के लिए मेरा संदेश यही है कि हमारे पास वैल्यू-बेस्ड एजुकेशन होनी चाहिए। हमें इस तरह की एजुकेशन की जरूरत है, जिसमें छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सके। इसमें छात्रों का फिजिकल, मेंटल, इंटेलेक्चुअल और इमोशनल डेवलपमेंट होना चाहिए। एजुकेशन एक बहुत शक्तिशाली टूल है, जिससे पूरी दुनिया को बदला जा सकता है। एक व्यक्ति में दया, मानवता, और सहनशीलता जैसे सभी गुण होने चाहिए।




