नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के चलते पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता का भारत सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम रहा है और देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से शनिवार को दिया गया।राष्ट्रीय राजधानी में 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (केईसी 2026) में “बदलाव के दौर में मजबूती: भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं” विषय पर आयोजित विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस दौर से उल्लेखनीय रूप से बेहतर स्थिति में निकला है। उसकी आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और इसमें और मजबूती आई है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2025 में बढ़कर जीडीपी के करीब 94 प्रतिशत तक पहुंच गया और 2029 तक इसके 100 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह स्तर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में आखिरी बार देखा गया था।
उन्होंने कहा, “मूल्य संबंधी झटके को मौद्रिक और राजकोषीय उपायों से कम किया जा सकता है, लेकिन मात्रा संबंधी झटका व्यापक आर्थिक प्रणालियों, वितरण तंत्र की पहुंच और खुद राज्य की क्षमता की परीक्षा लेता है। ये झटके ऐसी दुनिया में आए हैं, जहां पहले से ही सुरक्षा कवच और कमजोर हो चुके हैं।”
वित्त मंत्री ने कहा, “वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। अगस्त 2026 में सीपीआई मुद्रास्फीति करीब 4.8 प्रतिशत रही और पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहा।”
उन्होंने आगे कहा कि 2014 से सरकार ने उन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए काम किया है, जिन पर सतत विकास निर्भर करता है जिसमें प्रतिक्रिया देने की राज्य की क्षमता, उत्पादन करने की अर्थव्यवस्था की क्षमता और नागरिकों एवं उद्यमों की विकास में भागीदारी की क्षमता शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “पहली बुनियाद परिवारों के स्तर पर लचीलेपन को मजबूत करना है। यह सरकारी खर्च और सरकारी पहलों को लोगों के जीवन में ठोस सुधार में बदलकर किया गया है। पारदर्शी तंत्र, कड़ी निगरानी और योजनाओं को लागू करने के जुनून ने यह सुनिश्चित किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे।”
जन धन-आधार-मोबाइल (जेएएम) त्रिमूर्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) ने लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुंचाने वाली प्रणालियों को मजबूत किया। योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन से पीएम आवास योजना के तहत आवास, स्वच्छ भारत के तहत स्वच्छता, उज्ज्वला के तहत स्वच्छ खाना पकाने की गैस, आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सेवाओं और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत खाद्य सुरक्षा ने परिवारों की असुरक्षा के अलग-अलग स्रोतों को दूर करने में मदद की।
उन्होंने कहा, “दूसरी बुनियाद आर्थिक अवसर को उत्पादक गतिविधियों में बदलने की क्षमता है। वित्त तक पहुंच इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को समर्थन मिला है।”
वित्त मंत्री के अनुसार, पीएम स्वनिधि योजना रेहड़ी-पटरी वालों को सहायता देती है। अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण से वांछित दर पर ऋण उठाव बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। सरकार ने वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में कई कड़े सुधार किए, जिनमें पुनर्पूंजीकरण, संकट वाली परिसंपत्तियों का समाधान तथा बेहतर प्रशासन और जोखिम प्रबंधन ढांचे शामिल हैं।
अगस्त 2026 तक के एक वर्ष में गैर-खाद्य ऋण में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे आर्थिक गतिविधियों के लिए वित्त का प्रवाह बना रहा। मजबूत बैंकिंग क्षेत्र बाहरी अनिश्चितताओं का सामना कर रहे उद्यमों की भी मदद कर रहा है। कार्यशील पूंजी और बाजारों तक पहुंच महत्वपूर्ण बनी हुई है। आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना ने कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने, परिचालन और रोजगार बनाए रखने तथा व्यवधान के दौर में नकदी की कमी के दबाव से निपटने में मदद की।
उन्होंने कहा, “तीसरी बुनियाद वह बुनियादी ढांचा है, जो लोगों, कारखानों और बाजारों को जोड़ता है। इसका आकार यह निर्धारित करता है कि वस्तुओं की आवाजाही कितनी कुशलता से होगी, कारोबार कितने व्यापक स्तर पर संचालित हो सकेंगे और विभिन्न क्षेत्र अर्थव्यवस्था में कितनी पूरी तरह भागीदारी कर पाएंगे।”
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अकेले पूंजीगत व्यय के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह नॉमिनल के लिहाज से 2004-05 से 2013-14 के पूरे दशक के दौरान केंद्र द्वारा खर्च किए गए 12.39 लाख करोड़ रुपए के लगभग बराबर है। इसमें पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए दिए गए अनुदान भी शामिल हैं।
प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपए है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, “2014 से लगातार किए गए निवेश के संचयी परिणाम दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार करीब 61 प्रतिशत हुआ है, परिचालन रेलवे मार्ग दोगुने से अधिक हो गए हैं और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”
चौथी बुनियाद मजबूत सुधारवादी सोच वाला नेतृत्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुधारों को मजबूरी के बजाय दृढ़ विश्वास के विषय के रूप में देखते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा, “केंद्र सरकार ने जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी), चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिए राष्ट्रीय स्तर के ढांचे को आगे बढ़ाया है।”
उन्होंने आगे कहा कि परिचालन हवाई अड्डों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता करीब 60 प्रतिशत बढ़ी है। सीतारमण ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी), श्रम संहिताओं और जन विश्वास से जुड़े उपायों सहित सरकार के सुधारों का जिक्र किया।













