जकार्ता। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज तरक्की की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और पिछले कई वर्षों से उनकी नीतियों को ध्यान से देखते और समझते रहे हैं।

जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो ने भारत और भारतीय संस्कृति के प्रति अपना गहरा लगाव भी जताया।

उन्होंने कहा, "भारत की अपनी राजकीय यात्रा से ठीक पहले मैंने डीएनए की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच कराई थी। उसमें पता चला कि मेरे डीएनए में भारतीय मूल भी है। यह बिल्कुल सच है। शायद इसी वजह से जब भी मैं कोई संगीत सुनता हूं, खासकर भारतीय संगीत, तो मेरा शरीर अपने आप थिरकने लगता है।" उनकी इस बात पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं।

इसके बाद राष्ट्रपति प्रबोवो ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें लगता है कि उनकी कैबिनेट के ज्‍यादातर मंत्रियों के डीएनए में भी भारतीय मूल होगा।

उन्होंने कहा, "आज हमारे राष्ट्रपति भवन में राजकीय भोज था। ऐसे कार्यक्रम आम तौर पर बहुत औपचारिक होते हैं, लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पाया। मेरे मंत्री और हमारे जनरल सभी नाचना और गाना पसंद करते हैं। उनमें से शायद ज्‍यादातर के डीएनए में भी भारतीय मूल है। मेरे कई मंत्री तो भारतीय गाने भी बहुत अच्छी तरह गाते हैं।"

उन्होंने भारत की अपनी यात्रा और साल 2025 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते हमेशा से बहुत दोस्ताना रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि लोकतंत्र आसान व्यवस्था नहीं है, लेकिन अब तक इंसानों ने जितनी भी व्यवस्थाएं अपनाई हैं, उनमें यह सबसे बेहतर है।

उन्होंने कहा, "हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में से दो हैं। लोकतंत्र आसान रास्ता नहीं है। कई बार इसमें बहुत उलझनें और मुश्किलें आती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि हम सभी मानते हैं कि न्याय, उम्मीद और सबको साथ लेकर चलने के लिए यही सबसे अच्छा तरीका है। लोकतंत्र में खतरे भी हैं, चुनौतियां भी हैं और कुछ लोग इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखना होगा।"

उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग भाषाओं और समुदायों वाले इतने बड़े देश में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के मामले में इंडोनेशिया भारत के चुनाव आयोग से बहुत कुछ सीख रहा है।

उन्होंने कहा, "हम भारत के चुनाव आयोग से बहुत करीब से सीख रहे हैं। भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, जहां कई जातीय समूह और अलग-अलग भाषाएं हैं, ठीक हमारी तरह। इसके बावजूद इतने वर्षों से यहां शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव होते रहे हैं और सत्ता का बदलाव भी शांतिपूर्ण ढंग से होता है। यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। मैंने खुद इसका अध्ययन किया है और भारत की इस सफलता को लगातार देखा है।"

राष्ट्रपति प्रबोवो ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रशंसा का भी खुलकर ज‍िक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मोदी सरकार की कई नीतियों से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी अपनाया है।

उन्होंने कहा, "मैं भारत की घरेलू राजनीति में कुछ नहीं कहना चाहता। मैं सभी भारतीयों का दोस्त हूं। लेकिन मैं एक बात जरूर स्वीकार करना चाहता हूं। मेरे करीबी सहयोगी भी इसकी पुष्टि करेंगे कि मैं नरेंद्र मोदी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं सिर्फ अच्छी बातें करने के लिए यह नहीं कह रहा। मैं पेशेवर राजनेता नहीं हूं। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि मैंने पांच आम चुनाव लड़े और उनमें से चार हार गया। राष्ट्रपति बनने से पहले ही मैं प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का अध्ययन करता था। उन नीतियों पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए मैंने उनमें से कई नीतियां यहां भी अपनाईं। प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी उदारता से मुझे ऐसा करने दिया, इसलिए अब मुझ पर कोई मुकदमा भी नहीं कर सकता।"

उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि इंडोनेशिया को भारत के अनुभवों से सीखना चाहिए।

अपने संबोधन के आखिर में उन्होंने कहा, "असल में हमारी सभ्यता और संस्कृति पर सैकड़ों वर्षों से भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव रहा है। हमारी भाषा के लगभग 50 प्रतिशत शब्द संस्कृत से आए हैं। हमारे कई लोगों के नाम भी संस्कृत से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच इतनी नजदीकी है। हम दोनों देशों के बीच और भी मजबूत सहयोग का स्वागत करते हैं।"