कटनी/भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब एयर इंडिया की पूर्व एयर होस्टेस और वर्तमान में कटनी में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पचिसिया पर पद के दुरुपयोग, जमीन हड़पने और रंगदारी वसूलने के गंभीर आरोप लगे। मामले की गंभीरता और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस विभाग ने 8 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग आईजी प्रमोद वर्मा कर रहे हैं।
एविएशन की चकाचौंध से एमपीपीएससी तक: कौन हैं नेहा पचिसिया?
मूल रूप से राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली नेहा पचिसिया ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एविएशन क्षेत्र में कदम रखा और कई वर्षों तक एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा की ओर रुख किया और वर्ष 2012 में MPPSC की परीक्षा दी। वर्ष 2016 में घोषित परिणामों में उन्होंने प्रदेश भर में 20वीं रैंक हासिल कर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) का पद प्राप्त किया। उनकी पहली पदस्थापना गुना जिले में सीएसपी के रूप में हुई, जहां उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए 'मोबाइल पुलिस स्टेशन' जैसी पहल की शुरुआत की थी। इसके बाद वे पुलिस मुख्यालय भोपाल और खंडवा में भी पदस्थ रहीं। मई 2025 में उनका स्थानांतरण कटनी सीएसपी के पद पर हुआ था।
आईजी की जांच में खुले राज: बंधक बनाकर 80 लाख की जमीन 18 लाख में लिखवाई
जबलपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। जांच के अनुसार, कन्हवारा निवासी पीड़ित रमेश लोधी को पहले रंगनाथ नगर थाने में और फिर दो दिनों तक सीएसपी के शासकीय आवास में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया। आरोप है कि लगभग 80 लाख रुपये मूल्य की जमीन को दबाव बनाकर एक एजेंट के जरिए महज 18 लाख रुपये में सीएसपी के करीबी सहयोगी के नाम रजिस्ट्री करवा लिया गया। रजिस्ट्री के दिन पीड़ित कहीं भाग न जाए या किसी से शिकायत न कर दे, इसके लिए उसे सीएसपी की सरकारी गाड़ी में बैठाकर कड़ी निगरानी के बीच रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया था।
75 लाख की और रंगदारी: शिकायत करने पर दर्ज केस में फंसाकर भेजा जेल
जमीन छिन जाने के बाद जब पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई और पटवारी के समक्ष नामांतरण रोकने का आवेदन दिया, तो सीएसपी ने उस पर दर्ज एक पुराने हत्या के मामले का फायदा उठाकर धमकाना शुरू कर दिया।
आरोप है कि सीएसपी ने पीड़ित से कहा कि यदि वह जेल जाने से बचना चाहता है, तो उसे 75 लाख रुपये और देने होंगे और रकम मिलने पर कोर्ट में बयान बदलवाकर उसे बरी करवा दिया जाएगा। जब पीड़ित ने यह भारी-भरकम रकम देने से इनकार कर दिया, तो सीएसपी ने रमेश और उसके दामाद को उसी हत्या के मुकदमे में आरोपी बनाकर जेल भिजवा दिया। इसके अलावा, एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर से भी अवैध वसूली करने का मामला सामने आया, जिसके बाद कुथला थाने में नेहा पचिसिया, मारूफ अहमद और क्षितिज राज के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया गया।
सीएम का कड़ा रुख: सीएसपी दफ्तर सील, 8 सदस्यीय SIT करेगी जांच
एफआईआर दर्ज होने और मामले की गूंज भोपाल तक पहुंचते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सचिव और डीजीपी को तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। निलंबन आदेश जारी होते ही पुलिस बल ने कटनी स्थित सीएसपी कार्यालय और स्टाफ रूम को सील कर दिया है, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पंजियों से छेड़छाड़ न की जा सके।
मामले की विस्तृत और पारदर्शी जांच के लिए 8 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। टीम में विशेष रूप से साइबर विंग के तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR), लोकेशन, व्हाट्सएप चैट और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक पड़ताल करेंगे। एसआईटी जमीन के पूरे सौदे से लेकर कोर्ट से डिफॉल्ट बेल मिलने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ेगी। वहीं, मामले में संलिप्त पाए जाने वाले अन्य पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।




