पन्ना/गुनौर, जीतेन्द्र रजक : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा पन्ना जिले की ग्राम पंचायत डिघोरा में कागजों और अधूरी जमीनी हकीकत के बीच दम तोड़ता नजर आ रहा है। गांव में योजना के तहत घर-घर पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन लगाने का कार्य तो कर दिया गया है, लेकिन पानी की आपूर्ति के लिए मुख्य रूप से बनाई जा रही पानी की टंकी का निर्माण कार्य लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़ा है। टंकी का निर्माण अधूरा होने के कारण इस पूरी योजना का संचालन अधर में लटक गया है और ग्रामीणों को आज भी शुद्ध पेयजल मिलने का बेसब्री से इंतजार है।

जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण अंचल के प्रत्येक परिवार को नल के माध्यम से नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, ताकि महिलाओं को दूर-दराज से पानी ढोने की समस्या से मुक्ति मिल सके। लेकिन डिघोरा गांव में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। गांव की गलियों में नल कनेक्शन तो लगा दिए गए हैं और जगह-जगह पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है, परंतु जब तक पानी की मुख्य टंकी बनकर तैयार नहीं होगी, तब तक इस व्यवस्था से एक बूंद पानी भी घरों तक पहुंचना संभव नहीं है। निर्माण कार्य में हो रही इस लंबी और उदासीन देरी के चलते ग्रामीणों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर रोष व्याप्त है और योजना के पूर्ण संचालन को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए ग्राम पंचायत डिघोरा के सरपंच राम प्रताप पटेल ने प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ सकारात्मक पहल की है। उन्होंने पन्ना कलेक्टर और जल जीवन मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों को पूर्व में ही लिखित पत्र प्रेषित कर पूरे मामले से अवगत कराया है। अपने पत्राचार के माध्यम से सरपंच ने बंद पड़े टंकी निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू कराने की पुरजोर मांग उठाई है, ताकि अटका हुआ काम जल्द से जल्द पूरा हो सके और क्षेत्र के प्यासे ग्रामीणों को नल से जल की सुविधा सुलभ हो सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर डिघोरा गांव में इस महत्वपूर्ण टंकी का निर्माण कार्य कब तक पूरा किया जाएगा और प्रशासन इस पर कब गंभीर होगा। ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देता जा रहा है, ऐसे में संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। विभाग को निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करते हुए ठेकेदार या संबंधित एजेंसी पर शिकंजा कसना चाहिए, ताकि अधूरे पड़े निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा कराया जा सके और क्षेत्रवासियों को जल जीवन मिशन का वास्तविक लाभ मिल सके।