ग्वालियर/भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में भोपाल ग्रामीण में तैनात डीआईजी राजेश सिंह चंदेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्वालियर की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2023-24 के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसपी राजेश सिंह चंदेल सहित तीन अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट और डकैती जैसी गंभीर धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जिला न्यायालय के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) सुनील दंडोतिया ने इस परिवाद को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को 22 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के लिए तलब किया है।
यह पूरा मामला जबरन वसूली और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिवादी अनूप राणा के अनुसार, जब राजेश सिंह चंदेल ग्वालियर के एसपी थे, तब थाटीपुर थाने के तत्कालीन प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा ने एक मामले को रफा-दफा करने के बदले उनसे करीब 30 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली थी। आरोप है कि जब पीड़ित ने इसकी शिकायत तत्कालीन एसपी से की, तो उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उल्टा पीड़ित को ही झूठे मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया।
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की भूमिका उस वक्त संदिग्ध पाई गई जब थाने के सीसीटीवी फुटेज मांगे गए। पुलिस ने तर्क दिया कि पुराने फुटेज डिलीट हो चुके हैं, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने माना कि इतनी बड़ी वसूली बिना वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण के संभव नहीं थी, जिसके आधार पर आईपीसी की धारा 395 (डकैती) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, डकैती की धाराओं में मामला दर्ज होने के कारण अब आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि इन धाराओं में निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिलने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को राहत के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी होगी। इस आदेश के बाद से ही पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।



