नई दिल्ली। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को एक इंटीग्रेटेड रोडमैप पेश किया। यह रोडमैप केंद्र सरकार के 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' प्रस्ताव, राज्य के समृद्ध समुद्री और तटीय संसाधनों, बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के नेटवर्क को आपस में जोड़ता है।एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के तहत आने वाले भुवनेश्वर स्थित 'इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज' के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया, जिसके लिए ओडिशा राज्य सरकार से अतिरिक्त 50 एकड़ जमीन का प्रावधान किया गया है।

संस्थान की बढ़ी हुई क्षमता लाइफ साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी में रिसर्च के लिए और बायो-ई3 फ्रेमवर्क (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए बायोटेक्नोलॉजी) से जुड़ी पहलों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्वी तटीय क्षेत्र भारत के उभरते न्यूक्लियर और समुद्री रोडमैप में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिसमें ओडिशा केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों के माध्यम से योगदान देने की अच्छी स्थिति में है।

यह दृष्टिकोण अलग-अलग संस्थानों की पहलों से हटकर एक ऐसे जुड़े हुए इकोसिस्टम की ओर बढ़ने का प्रयास करता है, जिसमें समुद्री संसाधन, महत्वपूर्ण खनिज, लाइफ़ साइंसेज, स्पेस टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी-आधारित आर्थिक विकास शामिल हों।

डॉ. सिंह ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी कैबिनेट मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा के साथ रोडमैप पर चर्चा कर रहे थे, जिन्होंने राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं से संबंधित कई प्रस्ताव पेश किए।

चर्चाओं में समुद्री बायोटेक्नोलॉजी का विस्तार, लाइफ साइंसेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, ओडिशा के तटीय और खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग, स्पेस एप्लीकेशन और मैन्युफैक्चरिंग, रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) की खोज, वैज्ञानिक बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय समुद्री-पर्यावरण पहलों में तटीय जिलों की भागीदारी जैसे विषय शामिल थे।

चर्चाओं में ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (ओएमबीआरआईसी) पर भी बात हुई, जिसे राज्य के प्रमुख शैक्षणिक और रिसर्च संस्थानों को एक साथ लाने वाले एक सहयोगी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बयान में कहा गया है कि ओएमबीआरआईसी ने पहले ही आईआईटी भुवनेश्वर, बरहमपुर यूनिवर्सिटी, फकीर मोहन यूनिवर्सिटी, एनआईटी राउरकेला, आईआईएसईआर बरहमपुर और इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (आईएलएस), भुवनेश्वर के साथ साझेदारी स्थापित कर ली है।

समुद्री बायोटेक्नोलॉजी और अर्थ साइंसेज (पृथ्वी विज्ञान) के बीच प्रस्तावित तालमेल का उद्देश्य ओडिशा के तटीय संसाधनों की वैज्ञानिक समझ और उनके टिकाऊ उपयोग को मजबूत करना भी है।

यह दृष्टिकोण समुद्री विज्ञान, अर्थ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी और खनिज-संसाधन रिसर्च में विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा, जिससे संयुक्त परियोजनाओं और टेक्नोलॉजी विकास के लिए अधिक गुंजाइश बनेगी।

बैठक में राज्य की स्पेस क्षमताओं को आईएसआरओ के साथ जोड़ने पर भी विचार किया गया, जिसमें पीपीपी मोड में स्पेस रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर विकसित करने की संभावना भी शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसा इकोसिस्टम सरकारी संस्थानों, राष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों, रिसर्च संगठनों और इंडस्ट्री को एक साथ ला सकता है।