नैरोबी। केन्या ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्वारंटीन के उपायों, हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर स्क्रीनिंग, तथा संक्रमण रोकने के प्रयासों को तेज कर दिया, क्योंकि देश में इबोला के मामलों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, केन्या के स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य महानिदेशक पैट्रिक एमोथ ने बताया कि शुक्रवार को इबोला बुंडीबुग्यो वायरस बीमारी का जो मामला सामने आया, वह 65 वर्षीय एक महिला का है। यह महिला इस बीमारी के पहले और दूसरे मामलों के करीबी रिश्तेदारों में से एक थी।
वह 6 अक्टूबर से ही क्वारंटीन में थीं और उन्हें बुखार, गले में खराश और अस्वस्थता महसूस हो रही थी।
एमोथ ने कहा, "क्वारंटीन में रहने की वजह से बीमारी का जल्दी पता चल गया और उन्हें अभी जरूरी देखभाल (सपोर्टिव केयर) दी जा रही है। इससे उनके ठीक होने की संभावना बढ़ गई है और बीमारी के आगे फैलने का खतरा भी कम हो गया है।"
बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए एमोथ ने बताया कि केन्या ने अपनी निगरानी (सर्विलांस) व्यवस्था को काफी मजबूत कर लिया है। इसके तहत बीमारी के संपर्क में आए 130 लोगों की पहचान की गई थी, जिनमें से 127 लोगों को सफलतापूर्वक ढूंढ लिया गया और क्वारंटीन कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, "बीमारी के संपर्क में आए 130 लोगों में से 127 (97.7 प्रतिशत) को ढूंढकर क्वारंटीन कर दिया गया है। यह आंकड़ा संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जरूरी 85 प्रतिशत के वैश्विक मानक से कहीं अधिक है। बाकी बचे तीन लोगों को खोजने और क्वारंटीन करने के प्रयास अभी भी जारी हैं।"
एमोथ ने कहा कि देश में अभी भी खतरा कम है, क्योंकि कम्युनिटी ट्रांसमिशन (समुदाय में संक्रमण फैलने) का कोई सबूत नहीं मिला है। क्वारंटीन में रखे गए लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि अगर कोई नया मामला सामने आता है तो उसका तुरंत पता लगाकर इलाज किया जा सके।
12 अक्टूबर को केन्या ने 'पब्लिक हेल्थ एक्ट' (जन स्वास्थ्य अधिनियम) के तहत इबोला को एक गंभीर महामारी घोषित कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने बीमारी की निगरानी, स्क्रीनिंग, आइसोलेशन, क्वारंटीन और संदिग्ध संक्रमणों के प्रबंधन से जुड़े नए नियम भी लागू किए हैं।
नियमों के तहत प्रवेश के प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) करना अनिवार्य है। संदिग्ध मामलों की मेडिकल जांच की जानी चाहिए, और मरीजों को आइसोलेट (अलग) करके इलाज के लिए भेजा जाना चाहिए। जिन लोगों के वायरस के संपर्क में आने की आशंका है, उनकी भी निगरानी की जानी चाहिए और उन्हें क्वारंटाइन किया जाना चाहिए।
इन नियमों में यह भी कहा गया है कि इबोला के मामलों को संभालने के लिए कुछ स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष रूप से नामित किया जाए। साथ ही, उन जगहों की जांच और उन्हें संक्रमण-मुक्त (डीकंटैमिनेट) करने की प्रक्रिया भी तय की जानी चाहिए, जहां संक्रमण फैलने की संभावना रही हो।
केन्या ने 'इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशंस (2005)' के अनुसार, इबोला का अपना पहला मामला सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को इसकी सूचना दी।
केन्या में डब्ल्यूएचओ की प्रतिनिधि नीमा किमाम्बो ने शुक्रवार को बताया, "दो नए मामलों का पता जल्दी चल गया, क्योंकि ये लोग पहले से ही क्वारंटाइन में थे और हर दिन इनकी जांच की जा रही थी।"
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय, केन्या नेशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट, और राष्ट्रीय तथा काउंटी स्तर की स्वास्थ्य टीमों की त्वरित कार्रवाई के लिए सराहना की।
उन्होंने आगे कहा, "हम स्वास्थ्य कर्मियों, रिस्पॉन्स टीमों और क्वारंटाइन में रह रहे परिवारों का उनके समर्पण के लिए धन्यवाद करते हैं।"
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी), युगांडा और फ्रांस के बाद, केन्या दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जहां इबोला वायरस बीमारी की पुष्टि हुई है।
केन्या और युगांडा में इबोला के ज्यादातर मामले डीआरसी से आए हैं, जबकि फ्रांस का मामला यात्रा से जुड़ा था और जून में सामने आया था।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 'बुंडीबुग्यो इबोला' के शुरुआती लक्षण मलेरिया या अन्य सामान्य बीमारियों जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, थकान, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, फिलहाल 'बुंडीबुग्यो इबोला' के लिए कोई अधिकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, डीआरसी में इसके क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।
केन्या की सीमाएं खुली हुई हैं और यात्रा, व्यापार या सार्वजनिक कार्यक्रमों पर कोई पाबंदी नहीं है।
















