काहिरा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने ऐलान किया है कि वह 2030 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा दावेदारी पेश नहीं करेंगे। शनिवार को मिलिट्री अकादमी के ग्रेजुएशन समारोह में उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि मिस्र के संविधान को नहीं छुआ जाएगा। यह पूरी तरह तय मामला है और इस पर कोई चर्चा नहीं होगी।"

न्यूज एजेंसी एमईएनए ने बताया कि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने शनिवार को कहा कि 2030 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह पद पर बने रहने की कोशिश नहीं करेंगे। उन्होंने इस मामले को "पूरी तरह से तय" बताया।

71 वर्षीय सीसी, जो सेना के पूर्व जनरल हैं और 2014 में राष्ट्रपति बने थे, ने यह बात 'न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल' में मिस्र की मिलिट्री एकेडमी के एक दीक्षांत समारोह में कही। यह राजधानी उनके प्रमुख मेगा-प्रोजेक्ट्स में से एक है।

काहिरा के पूर्व में स्थित इस विशाल नए शहर में, ग्रेजुएट्स और सरकारी अधिकारियों को संबोधित करते हुए सीसी ने कहा कि मिस्र के संविधान के साथ "कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी"।

उन्होंने कहा, "अगर मैं तब तक जीवित रहा, तो 2030 तक का समय राष्ट्रपति के रूप में मेरे कार्यकाल का अंत होगा। यह बात पूरी तरह से तय है और इस पर अब कोई चर्चा नहीं होगी।"

मिस्र का संविधान, जिसे 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना द्वारा सत्ता से हटाए जाने के बाद 2014 में मंजूरी दी गई थी, उसमें मूल रूप से राष्ट्रपति के लिए चार-चार साल के दो कार्यकाल की सीमा तय की गई थी।

2019 के जनमत संग्रह में मंजूर किए गए संवैधानिक संशोधनों के तहत, राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। साथ ही, इसमें कुछ ऐसे प्रावधान भी जोड़े गए, जिनकी मदद से सीसी एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ सके।

इन्हीं संशोधनों के तहत, 2023 में सीसी को छह साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया, जो 2030 में समाप्त होगा।

इस बीच आलोचकों और विपक्ष के नेताओं ने आशंका जताई कि संविधान में और बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे सीसी 2030 के बाद भी पद पर बने रह सकें।

राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने से पहले, सीसी ने कहा था कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। लेकिन 2014 में उन्होंने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और चुनावी दौड़ में शामिल हो गए, जिसमें उनकी जीत हुई।

शनिवार को उन्होंने कहा कि 2030 तक के समय का उपयोग नेताओं की एक नई पीढ़ी तैयार करने के लिए किया जाएगा। इसके तहत मिलिट्री एकेडमी में सैकड़ों भावी अधिकारियों, मंत्रियों और राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों को शासन-संचालन और नेतृत्व का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सत्ता में अपने 12 वर्षों के दौरान, सीसी ने सरकार के नेतृत्व में कई बड़े विकास कार्यक्रमों (मेगा-प्रोजेक्ट्स) को आगे बढ़ाया है। आलोचकों का कहना है कि ये परियोजनाएं काफी हद तक कर्ज पर निर्भर रही हैं, जिससे मिस्र पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और आर्थिक दबाव पैदा हुआ है।

सिसी के राष्ट्रपति कार्यकाल को राजनीतिक विपक्ष, नागरिक समाज और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है। सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उसकी नीतियां जरूरी हैं।