छतरपुर। छतरपुर जिले के नौगांव स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय (न्यायाधीश पंकज कुमार जैन) ने एक बेहद जघन्य एवं सनसनीखेज हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीनों मुख्य आरोपियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। यह खौफनाक वारदात शराब पार्टी के दौरान मृतक को जूठे गिलास में शराब परोसने के मामूली विवाद से शुरू हुई थी, जिसके बाद आरोपियों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उसका सिर धड़ से अलग कर दिया था। न्यायालय ने तीनों दोषियों पर आजीवन कारावास के साथ 2,000–2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
दोषी करार दिए गए आरोपी:
- दिब्बू उर्फ देवेन्द्र रैकवार
- पप्पू अनुरागी
- लक्ष्मी प्रसाद उर्फ खचोरी
अदालत ने तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1) एवं सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
सड़क पर पड़ा मिला था धड़ और चबूतरे पर कटा सिर
वारदात 20 अक्टूबर 2024 की है। फरियादी जाहर सिंह सेंगर को सुबह करीब 6-7 बजे सूचना मिली कि उनके भाई विशाल सिंह सेंगर का शव गांव में आरोपी पप्पू अनुरागी के मकान के सामने पड़ा हुआ है। जब परिजन मौके पर पहुँचे, तो दृश्य देखकर दहल गए। विशाल का धड़ सड़क पर पड़ा था और उसका कटा हुआ सिर पास के चबूतरे पर रखा हुआ था। थाना अलीपुरा पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया और उपनिरीक्षक डी.डी. शाक्य ने विवेचना शुरू की। मामले की संवेदनशीलता और वीभत्सता को देखते हुए जिला स्तरीय समिति ने इसे 'चिन्हित जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध' की श्रेणी में शामिल किया था।
हत्या की वजह: झूठे गिलास में शराब देने पर उपजा विवाद
पुलिस जांच के दौरान मृतक के साथ अंतिम बार देखे गए संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आरोपियों ने अपने मेमोरेंडम में जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि वे सभी मृतक विशाल सिंह के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान विशाल को किसी अन्य का जूठा गिलास शराब पीने के लिए दे दिया गया। इस बात को लेकर विशाल और आरोपियों के बीच तीखी कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। गुस्से में आकर तीनों आरोपियों ने मिलकर कुल्हाड़ी व धारदार हथियार से विशाल की गर्दन काटकर धड़ से अलग कर दी और मौके से फरार हो गए।
पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत कड़ियों से सिद्ध हुआ अपराध
प्रकरण में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी (चश्मदीद) गवाह मौजूद नहीं था, जिसके चलते यह पूरा केस पारिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) पर टिका हुआ था। अदालत में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक दयाराम पाठक ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और कड़ियों को जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष संदेह से परे अपराध साबित किया। मीडिया सेल प्रभारी (ADPO) के.आर. पटेल ने बताया कि अदालत ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया।




