मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार रासायनिक उद्योग के लिए एक समर्पित नीति तैयार कर रही है, जिसे नवंबर के पहले सप्ताह में आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा। इस नीति के तहत पालघर जिले के वधावन बंदरगाह क्षेत्र में एक बड़े रासायनिक औद्योगिक केंद्र को विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इंडिया केम 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई नीति का उद्देश्य उद्योगों की बदलती जरूरतों को पूरा करना, निवेश के अनुकूल बुनियादी ढांचा विकसित करना और राज्य में रासायनिक उद्योग के विस्तार को गति देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में रासायनिक उद्योग की करीब 3,600 इकाइयां हैं। देश के रासायनिक क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय रासायनिक निर्यात में महाराष्ट्र का योगदान 17 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि मैत्री और इन्वेस्ट महाराष्ट्र जैसे सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य सरकार निवेशकों को मंजूरी दिलाने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बना रही है।

फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र में रासायनिक क्षेत्र वर्तमान में लगभग तीन लाख लोगों को रोजगार देता है। नई नीति के तहत रोजगार के अवसरों को दोगुना करने की क्षमता है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर बीना में 50,000 करोड़ रुपये की पेट्रोकेमिकल परियोजना का उल्लेख किया। उन्होंने प्लास्टिक और गैस आधारित औद्योगिक पार्कों के विस्तार की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।

वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि उनका राज्य खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से रासायनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए तटीय बंदरगाहों की क्षमता का उपयोग करते हुए ग्रीन हाइड्रोजन, पेट्रोकेमिकल और उर्वरक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार अनुकूल नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देकर रासायनिक उद्योग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

नड्डा ने बताया कि भारत का रासायनिक उद्योग फिलहाल लगभग 220 अरब डॉलर का है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2040 तक इसे एक लाख करोड़ डॉलर और 2047 तक 1.6 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि बल्क ड्रग पार्क योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक की सहायता दे रही है। इसके लिए राज्य सरकारों को कम से कम 500 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा, ताकि विश्वस्तरीय औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित किया जा सके।

नड्डा ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने उन्नत रसायनों को एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष में शामिल किया है। उन्होंने औद्योगिक सुरक्षा, खतरनाक रसायनों के सुरक्षित प्रबंधन, श्रमिकों के प्रशिक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्लास्टिक पुनर्चक्रण के बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और गुजरात के राज्य मंत्री प्रफुल्ल पंशेरिया ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने नियमों के अनुपालन को आसान बनाने और उद्योगों को नियामकीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।